पीडीडीयू नगर। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर राखियों की दुकानें सज गई हैं, बाजार गुलजार है पर इस बार बाजार से चाइनीज राखियां गायब हैं। पहले जहां दुकानों पर चमकदार और इलेक्ट्रानिक चाइनीज राखियों की भरमार होती थी अब कहीं भी चाइनीज राखियां देखने तक को नहीं मिल रही हैं। दुकानदारों का कहना है कि लोग चाइनीज राखियों को अब पसंद नहीं कर रहे हैं इसकी वजह से हमलोग उसे नहीं ले आ रहे हैं।
रक्षाबंधन के बाजार में इस बार सिर्फ भारतीय राखियां बिक रहीं हैं। चाइना की बनी राखियों का क्रेज खत्म हो गया है। हैंड मेड राखियों व धागे वाली राखियों की खूब बिक्री हो रही है। दो वर्ष कोरोना के कारण राखियों का बाजार कम हुआ था। इस बार थोक व फुटकर दुकानों में राखियों की बिक्री पहले की ही तरह हो गई है। देश-विदेश में रह रहे भाइयों के लिए बहनें राखियां खरीदकर कोरियर और पोस्टआफिस के माध्यम से भेज रही हैं। कोरोना संक्रमण के कारण पिछले दो वर्षों में रक्षाबंधन में राखियों की बिक्री भी प्रभावित हुई थी। कोरोना और लॉकडाउन के कारण राखियों को कोरियर या स्पीड पोस्ट से कम भेजी गई। यातायात सुविधा में कमी के कारण आवागमन भी कम रहा। इससे बिक्री भी प्रभावित रही। पीडीडीयू नगर के थोक और फुटकर राखियों के विक्रेता मनोज जायसवाल ने बताया कि इस बार राखी की बिक्री दो वर्ष पहले की भांति हो रही है। चाइना मेड राखियां बाजार में नहीं है। कोई डिमांड भी नहीं है। हैंड मेड राखियों ने बाजार में जगह बनाई है। बाहर भेजने के लिए राखियों की बिक्री काफी बढ़ी है। राखी त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है वैसे राखियों की बिक्री बढ़ रही है।