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22 वर्षों से खेत की मेड़ से होकर विद्यालय जाते हैं बच्चे

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दुलहीपुर। एक ओर शासन की ओर से मिशन कायाकल्प और अन्य योजनाओं के तहत परिषदीय विद्यालयों को हाईटेक करने की बात की जा रही है वहीं दूसरी ओर नियामताबाद के कुंडा खुर्द गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के बच्चे आज भी खेत की मेड़ से होकर स्कूल जाने को विवश हैं। बच्चों के अभिभावकों के कई बार शिक्षा व जिला प्रशासन से शिकायत के बाद भी अब तक रास्ता नहीं बनवाया गया है।
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बच्चों को शिक्षित करने के लिए सरकार की ओर से क्षेत्र के कुंडाखुर्द गांव के बाहर वर्ष 2000 में प्राइमरी पाठशाला का निर्माण कराया गया। गांव में स्कूल बनने के बाद बच्चों व उनके अभिभावकों में हर्ष की लहर दौड़ गई। अभिभावकों ने सोचा कि स्कूल बनने से बच्चे के भविष्य को देखते हुए अच्छी शिक्षा मिलेगी। वहीं स्कूल तो बना दिया गया पर बच्चों के आने-जाने के लिए आज तक रास्ता नहीं बनवाया गया है। इससे बच्चे खेतों की मेड़ों से होकर स्कूल आने-जाने को विवश हैं। बच्चों को स्कूल आने-जाने में सबसे अधिक परेशानी बरसात के दिनों में होती है। उस समय चारों तरफ खेतों में पानी ही पानी भरा होता है। पानी के बीच से होकर स्कूल जाने को विवश बच्चे गिरकर चोटिल भी हो जाते हैं। साथ ही उनमें जहरीले जंतुओं के काटने का भय भी बना रहता है। बच्चों के अभिभावकों ने जिला प्रशासन से स्कूल आने-जाने के लिए रास्ते का निर्माण कराने की मांग की है।
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