कंदवा। मनुष्य अगर मति (बुद्धि) को नारायण की सेवा में लगा दे तो उसका कल्याण हो जाएगा। मति भी मन की तरह चंचल होती है। मनुष्य को इस मति को नारायण की सेवा में लगा देना चाहिए। अगर नारायण की कृपा हो जाए तो दूषित बुद्धि भी सुधर कर निर्मल हो जाएगी। यह बातें चिरईगांव में चल रहे चातुर्मास यज्ञ के दौरान सोमवार को सुंदर राज महाराज ने कही।
उन्होंने कहा कि अगर प्रभु की कृपा से हमारी मति निर्मल हो जाए तो हमारी मति(बुद्धि) में भी परिवर्तन हो जाता है। शास्त्र कहते हैं कि निर्मल बुद्धि का स्वामी नारायण होते हैं क्योंकि निर्मल बुद्धि से ही धीरे धीरे प्रयास करके हम मन को नारायण में लगा देते हैं। जिस प्रकार से चुम्बक लोहे को अपने से चिपका लेता है,ठीक उसी प्रकार से निर्मल बुद्धि वाले मन को नारायण स्वंय अपने पास हृदय में विराजमान कर देते हैं। वहीं निर्मल बुद्धि वाला व्यक्ति गंगा के समान पवित्र हो जाता है।