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नई किताबें नहीं आई, मजबूरी में पुरानी के सहारे कर रहे पढ़ाई

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चंदौली। नए शिक्षा सत्र के चालू हुए तीन माह हो गए। गर्मी की छुट्टियां भी समाप्त हो गई, बावजूद इसके परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को नई पाठ्य पुस्तकें नहीं मिली हैं। ऐसे में बच्चे पुरानी किताबों के सहारे पढ़ने को मजबूर हैं। कई बच्चों के पास किताबें ही नहीं हैं। वहीं किताब न पहुंचने कारण किताबों की छपाई में देरी बताइ जा रही है।
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एक अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हो गया है। शिक्षा विभाग के मुताबिक जब नौनिहाल अपनी नई कक्षा में पहुंचते हैं, तो उनको नई किताबें मिल जानी चाहिए, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। नए सत्र की किताबों की अभी छपाई नहीं हो सकी है। इसकी वजह से नई किताबें नहीं मिल सकी है। ऐसे में पुरानी किताबों के सहारे ही पढ़ाई शुरू करा दी गई है। जिले में कुल 1185 विद्यालय में यही हाल है। विभागीय अधिकारियों की ओर से शिक्षकों ने नौनिहालों को पुरानी किताबें जमा करने का निर्देश दिया था। इन किताबों से जिले में करीब ढाई लाख नौनिहाल पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यालय खुलने के बाद से पढ़ाई पुरानी किताबों से कराई जा रही है ।
चंदौली। जनपद में कुल 1185 विद्यालय है। यहां पर करीब 2.5 लाख नौनिहाल परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत है। इन नौनिहालों को पढ़ने के लिए करीब 20 लाख किताबों की जरूरत पड़ेगी। इन किताबों को शिक्षक जमा करवाकर वितरित करेंगे। इस दौरान तमाम विद्यार्थियों के पास किताबें फट भी चुकी है। ऐसे में वह अपनी किताबें जमा तो कर देंगे, लेकिन फटी पुरानी किताबों के सहारे बच्चे पढ़ाई करते हुए नजर आएंगे।जुलाई के बाद किताबें मिलने की उम्मीद है। संवाद
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नए सत्र की शुरुआत हो चुकी है। जब तक नई किताबें नहीं आ जाएंगी, तब तक शिक्षक पुरानी किताबों से पढ़ाई करवाएंगे। इसको लेकर सभी बीईओ को निर्देश दे दिए गए हैं। जुलाई माह तक किताबें आ जाने की उम्मीद है। उसके बाद विद्यालयों में वितरण करा दिया जाएगा। सत्येंद्र कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, चंदौली
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