नोएडा से आगरा तक बने जेपी एक्सप्रेस-वे के खिलाफ हुआ भट्टा-पारसौल आंदोलन एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। भट्टा-पारसौल आंदोलन में भाग लेने वाले 40 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ वारंट जारी हुए हैं। इसके विरोध में किसान सोमवार को धरनास्थल भट्टा पर पंचायत कर आगामी रणनीति का एलान करेंगे।
गौरतलब है कि, 2011 में जेपी एक्सप्रेस-वे के विरोध में भट्टा-पारसौल आंदोलन हुआ था। आंदोलन में करीब 50 हजार से ज्यादा किसानों ने भाग लिया था। इस हिंसक आंदोलन में सैकड़ों प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे।
तब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में भट्टा-पारसौल में डेरा डाल दिया था। किसान नेता मनवीर तेवतिया समेत सैकड़ों किसानों को जेल जाना पड़ा था। मामले की जांच सीबीसीआईडी कर रही थी। सीबीसीआईडी जांच में प्रदर्शनकारी किसानों को दोषी
माना गया है। सीबीसीआईडी की जांच रिपोर्ट में करीब 450 प्रदर्शनकारियों और हजारों अज्ञात प्रदर्शनकारियों को दोषी माना गया है। सीबीसीआईडी की जांच रिपोर्ट के आधार पर पहले चरण में दनकौर थाना क्षेत्र के 32 और रबूपुरा के छह व दो अन्य प्रदर्शनकारियों को गौतमबुद्धनगर न्यायालय ने वारंट जारी कर किया है।
वहीं, कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शनकारी किसानों ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को धरनास्थल पर किसान पंचायत कर एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे।
पंचायत में होगी आगे की रणनीति
किसान नेता मनवीर तेवतिया और देवरंजन नागर ने बताया कि पूरे मामले को लेकर सोमवार को धरनास्थल भट्टा पर पंचायत की जाएगी। पंचायत में सभी किसान मौजूद रहेंगे। सर्वसम्मति से पंचायत में जो निर्णय लिया जाएगा, उसी के तहत आगामी आंदोलन किया जाएगा। मनवीर तेवतिया ने स्पष्ट कर दिया कि यदि किसानों का उत्पीड़न हुआ तो आंदोलन बड़ा हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने की वादा खिलाफी: मनवीर
आंदोलन की अगुवाई करने वाले किसान नेता मनवीर तेवतिया और देवरंजन नागर का कहना है कि पूरे मामले में नौ एफआईआर दर्ज है। आंदोलन के समय भट्टा-पारसौल पहुंचे अखिलेश यादव ने कहा था कि उनकी सरकार आने पर सभी किसानों से केस वापस लिए जाएंगे। अखिलेश सरकार ने किसानों के साथ वादाखिलाफी की है।