बुलंदशहर में 19 वर्ष पूर्व हुई फर्जी मुठभेड़ के मामले में अब सेवानिवृत्त सीओ रणधीर सिंह पर 25 हजार का इनाम घोषित किया गया है। कोर्ट से बार-बार नोटिस जारी होने के बाद भी हाजिर न होने पर एसएसपी ने मंगलवार को कार्रवाई की है। पूरे प्रकरण में रिटायर्ड सीओ सहित आठ पुलिसकर्मियों पर आरोप है।
प्रकरण में आरोपी बनाए आठ पुलिसकर्मियों में से सतेंद्र, तोताराम, रघुराज और जीप चालक श्रीपाल ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। यह चारों फिलहाल जमानत पर हैं। इसके अलावा एसआई संजीव कुमार ने 20 सितंबर 2021 को कोर्ट में सरेंडर किया था। 22 सितंबर को आरोपी मनोज कुमार व 24 सितंबर को आरोपी जितेंद्र सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
तत्कालीन कोतवाली प्रभारी रिटायर्ड सीओ रणधीर सिंह फरार चल रहा है। कोर्ट से कई बार उसके गाजियाबाद स्थित वर्तमान आवास और उसके आगरा स्थित मूल आवास पर नोटिस भेजा गया लेकिन वह पेश नहीं हुआ।
यह था मामला
तीन अगस्त 2002 को सिकंदराबाद कोतवाली में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक रणधीर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि वह बुलंदशहर कोतवाली देहात सीमा से टीम के साथ गश्त करते हुए सिकंदराबाद की तरफ लौट रहे थे। गांव आढ़ा मोड़ के निकट बिलसूरी की तरफ से फायरिंग की आवाज सुनाई दी। जिस पर वह हमराह पुलिसकर्मी कांस्टेबल जितेंद्र सिंह, मनोज, जीप चालक श्रीपाल, संजीव कुमार, सतेंद्र, तोताराम एवं रघुराज के साथ मौके पर पहुंचे। वहां पर एक रोडवेज बस से उतरकर तीन बदमाश भागते दिखाई दिए। पुलिस टीम के रोकने पर बदमाशों ने फायरिंग की।
पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश की गोली लगने से मौत हो गई। मृतक की पहचान प्रदीप कुमार पुत्र यशपाल सिंह निवासी गांव सहपानी थाना सिकंदराबाद के रूप में हुई। सिकंदराबाद पुलिस ने जिस युवक को लुटेरा बताया था, वह युवक बीटेक का छात्र निकला था। पीड़ित परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया तो पुलिस ने मृतक के पिता समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने समेत अन्य कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया था। इसके बाद पीड़ित परिजनों ने मामले में कोर्ट की शरण ली थी। कोर्ट से सभी आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी किया गया था।
पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए कर रही दिखावा : यशपाल सिंह
एनकाउंटर में मारे गए छात्र प्रदीप के पिता यशपाल सिंह ने कहा कि पुलिस कोर्ट की कार्रवाई से बचने के लिए केवल दिखावा कर रही है। रिटायर्ड सीओ की गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयास ही नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि मामले में अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 20 अक्तूबर को होगी। बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए वह 19 साल से कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं। इस दौरान कई बार केस वापस लेने के लिए धमकी मिली है।
झांसी, गाजियाबाद, आगरा में पुलिस दे चुकी है दबिश
एएसपी नम्रता श्रीवास्तव ने बताया कि सेवानिवृत्त सीओ रणधीर सिंह की गिरफ्तारी के लिए क्राइम ब्रांच, एसओजी, कोतवाली सिकंदराबाद की टीमें दबिश दे रही हैं। उनका मूल पता आगरा का और वर्तमान पता गाजियाबाद का है। उनकी गिरफ्तारी के लिए आगरा, गाजियाबाद, झांसी, एनसीआर समेत अन्य जनपदों में भी दबिश दी गई।
सीओ की पत्नी ने सीजेएम कोर्ट में दायर कर रखी है याचिका
यशपाल सिंह ने बताया कि आरोपी फरार सीओ की पत्नी ने बुलंदशहर सीजेएम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। याचिका में सीओ की पत्नी ने उनके साथ कोई संबंध नहीं होने की बात कही है। याचिका में आरोपी की पत्नी ने बताया है कि वर्ष 2018 से उनका पति के साथ तलाक का मुकदमा चल रहा है। गाजियाबाद स्थित मकान उनके नाम पर है। यशपाल सिंह ने बताया कि कुर्की की कार्रवाई से बचने के लिए सीओ की पत्नी कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।
कोर्ट से बार-बार वारंट जारी होने के बाद भी आरोपी रिटायर्ड सीओ रणधीर सिंह ने अभी तक सरेंडर नहीं किया है। जिसके चलते अब उन पर इनाम घोषित किया गया है। पुलिस की टीम भी आरोपी को पकड़ने के लिए दबिश दे रही है। - संतोष कुमार सिंह, एसएसपी