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गन्ने की पौध तैयार करने में जुटे स्वयं सहायता समूह

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गन्ने की पौध तैयार करतीं एक स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। - फोटो : BULANDSHAHR
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गन्ने की पौध तैयार करने में जुटे स्वयं सहायता समूह
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बुलंदशहर। जिले में स्वयं सहायता समूह गन्ने की पौध तैयार करने में जुट गए हैं। इसके लिए जिला गन्ना विभाग की ओर से 80 समूहों को जिम्मेदारी दी गई है। प्रति पौध सरकार 1.50 रुपये अनुदान देगी और किसान को यह पौधा दो से तीन रुपये तक बेचा जा सकेगा। इस तरह से एक महिला समूह की करीब 40 दिन में अच्छी कमाई होने की संभावना है।
जिले में चार चीनी मिलें हैं। इनमें अनूपशहर, अनामिका, साबितगढ़ और वेव शुगर मिल शामिल हैं। इन सभी मिलों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में 20-20 स्वयं सहायता समूहों का चयन गन्ने की पौध तैयार करने के लिए किया गया है। शासन के आदेश पर जिला गन्ना विभाग ने चयनित स्वयं सहायता समूह से गन्ने की पौध तैयार करवाना शुरू कर दिया है। एक महिला समूह कम से कम 25 हजार पौधे तैयार कर सकता है। गन्ने की पौध तैयार करने में कोई लागत नहीं आएगी क्योंकि महिलाएं अपने ही खेत के गन्ने लेती हैं। जिनके पास खेत नहीं है, उन महिलाओं को गन्ना विभाग की ओर से गन्ना उपलब्ध करवाया जाता है। पौध तैयार करने के लिए सीड ट्रेड शीड कटर निशुल्क उपलब्ध करवाया गया है। महिलाओं द्वारा तैयार की जाने वाली पौध का भी विभागीय अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण कर रहे हैं। 80 समूह से जुड़ी 200 से अधिक महिलाएं गन्ने की पौध तैयार करने में जुटी हैं।
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नर्सरी में तैयार पौध से बंपर होती है फसल
गन्ना विभाग के अधिकारियों के अनुसार किसान अमूमन पुरानी विधि से ही गन्ने की बुआई करते हैं। इस विधि के तहत खेत में गड्ढा बनाया जाता है और उसमें गन्ने के टुकड़े डाल दिए जाते हैं। इस विधि से खेत में जहां-तहां गन्ने के अंकुर नहीं निकल पाते हैं लेकिन नर्सरी में तैयार पौध से गन्ने की फसल अच्छी होती है।
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सरकार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए गन्ने की पौध तैयार करवाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए शासन द्वारा भी उनकी मदद की जाएगी। जनपद में 80 समूह चयनित कर उनसे पौध तैयार करवाई जा रही है। - डीके सैनी, जिला गन्ना अधिकारी
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