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60 फीसदी अभिभावक स्कूल भेजने को तैयार

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अभिभावक कमल अग्रवाल। - फोटो : BULANDSHAHR
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60 फीसदी अभिभावक स्कूल भेजने को तैयार
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बुलंदशहर। कोरोना काल में बंद चल रहे स्कूल करीब पांच माह बाद एक फिर मंगलवार से गुलजार हो जाएंगे। स्कूलों में कक्षा छह से आठवीं तक की कक्षाआें का संचालन होगा। दो पालियों में चलने वाली कक्षाओं में विद्यार्थियों को सोशल डिस्टेंसिंग के तहत बैठने का सीटिंग प्लान किया गया है। 60 फीसदी से अधिक अभिभावकों ने भी स्कूल प्रबंधकों को स्वीकृति पत्र दे दिया है। पहले दिन करीब दो लाख से अधिक बच्चों के स्कूल पहुंचने की उम्मीद है।
जिला विद्यालय निरीक्षक शिव कुमार ओझा और बेसिक शिक्षा अधिकारी अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि शासन के आदेश पर अब कक्षा से छह से आठवीं तक के स्कूलों में कक्षाओं का संचालन सोमवार की बजाय मंगलवार से होगा। स्कूलों को कोरोना प्रोटोकॉल के तहत व्यवस्थाएं पहले से करने के निर्देश जारी किए गए हें। बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। कक्षा छह से आठवीं तक की कक्षाओं में करीब दो लाख बच्चे हैं। सुबह आठ से 11 बजे और साढ़े 11 बजे से ढाई बजे तक दो पालियों में कक्षाएं चलेंगी। स्कूल सोमवार से खुलने थे, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के आकस्मिक निधन के कारण अवकाश रहा।
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बोले अभिभावक
बच्चों की कक्षा न चलने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी, लेकिन अब स्कूल खुलने पर पढ़ाई पटरी पर लौटेगी और बच्चों को स्कूल में पढ़ने का मौका मिलेगा। - सावित्री।
अपने बच्चे को स्कूल भेजने की तैयारी पूरी कर ली है। ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों का मन ऊब चुका था, लेकिन अब स्कूल में पढ़ने का मौका मिलेगा तो पढ़ाई भी अच्छी होगी। - अर्चना शर्मा।
कक्षा चलने से छात्रों की पढ़ाई भी बाधित नहीं होगी। बच्चे भी स्कूल जाने के लिए तैयार हैं। स्कूल खुलने से बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई में आ रही कठिनाईयों से निजात मिलेगी। - पुष्पा।
अभी तक बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से कुछ लाभ नही मिल रहा था। अधिकतर अभिभावकों के पास एंड्रायड मोबाइल फोन नहीं है। अब कक्षाओं का संचालन होने पर स्कूल में ही पढ़ाई का बच्चों को मौका मिलेगा। - कमल अग्रवाल।
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बोले छात्र
लंबे समय से स्कूल नहीं खुलने के कारण कक्षाएं भी संचालित नहीं हो सकीं हैं। ऐसे में पढ़ाई प्रभावित होने के साथ कोर्स पूरा होने की चिंता बनी हुई थी। - भूमिका।
घर पर रहकर पढ़ाई करना आसान नहीं है। कभी नेट नहीं आता तो कभी शिक्षक से संपर्क नहीं हो जाता। हर समय पढ़ाई की चिंता बनी रहती है। - पायल शर्मा।
स्कूल खुलने का समाचार सुना तो तभी से तैयारी कर ली थी। अब बस अपने सहपाठियों के साथ बैठकर कक्षा पढ़ने का इंतजार है। - पंकज।
अब स्कूल खुलने से पढ़ाई पटरी पर लौटने की संभावना है। कक्षा में पढ़ाई का पूरा फायदा उठाऊंगा और स्कूल जाने की तैयारी कर ली है। - भव्य।
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