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सहपानी फर्जी मुठभेड़ : एक और सिपाही गिरफ्तार

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मृतक छात्र प्रदीप का फाइल फोटो। - फोटो : SIKANDRABAD
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सहपानी फर्जी मुठभेड़ : एक और सिपाही गिरफ्तार
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बुलंदशहर। तीन अगस्त 2002 को सिकंदराबाद के आढ़ा तिराहे के निकट हुई छात्र की फर्जी मुठभेड़ के मामले में आरोपी पुलिसकर्मी घिरते जा रहे हैं। मामले में शनिवार को एक और सिपाही को गिरफ्तार कर लिया गया। एक दरोगा और सिपाही पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं।
न्यायालय ने मामले में दो अप्रैल 2019 को तत्कालीन निरीक्षक सिकंदराबाद रणधीर सिंह (सेवानिवृत्त क्षेत्राधिकारी), तत्कालीन सिपाही संजीव कुमार (वर्तमान उपनिरीक्षक), सिपाही मनोज कुमार और जितेंद्र सिंह की गिरफ्तारी के लिए एनबीडब्ल्यू जारी किया था। इसके बाद संजीव कुमार ने 20 सितंबर को न्यायालय पहुंच कर आत्मसमर्पण किया। एक आरोपी कांस्टेबल मनोज कुमार ( वर्तमान में सेल टैक्स विभाग मथुरा में तैनाती) को 22 सितंबर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। शनिवार को पुलिस ने एक अन्य आरोपी सिपाही जितेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। सिकंदराबाद कोतवाली प्रभारी जयकरण सिंह ने बताया कि आरोपी सिपाही जितेंद्र सिंह शामली जिले के कांधला का रहने वाला है। वह अपने मुकदमे के संबंध में वकील से मिलने बुलंदशहर आ रहा था। इसी दौरान उसे सिकंदराबाद में गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे तत्कालीन इंस्पेक्टर रणधीर सिंह ने न तो आत्मसमर्पण किया और न पुलिस गिरफ्तारी कर सकी है।
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यह था पूरा मामला
तीन अगस्त 2002 को तत्कालीन थानाध्यक्ष सिकंदराबाद रणधीर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह देर रात बुलंदशहर देहात कोतवाली सीमा से टीम के साथ गश्त करते हुए वापस सिकंदराबाद की ओर लौट रहे थे। जब वह आढ़ा मोड़ के निकट पहुंचे तो बिलसूरी की ओर से फायरिंग की आवाज आई। जिस पर वह अपनी टीम के साथी कांस्टेबल जितेंद्र सिंह, मनोज, श्रीपाल चालक जीप, सतेंद्र, संजीव, तोताराम और रघुराज के साथ मौके पर पहुंचे। वहां एक रोडवेज बस से यात्रियों के चीखने की आवाज आ रही थी। इसी दौरान बस से तीन बदमाश निकलकर आढ़ा गांव की ओर भागने लगे। पुलिस ने रुकने का इशारा किया तो उन्होंने फायरिंग कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में एक युवक की मौत हो गई। जिसकी शिनाख्त प्रदीप कुमार (22) पुत्र यशपाल सिंह निवासी गांव सहपानी थाना सिकंदराबाद के रूप में हुई। पुलिस ने मृतक को बदमाश बताया। बाद में मामले की जांच होने पर सीबीसीआईडी ने एफआर लगा दी। उसी दौरान मृतक के पिता ने कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटिशन दायर की। जिसका संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने एफआर निरस्त कर दी और मामले में सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दायर कर जांच के निर्देश दिए। बाद में आरोपियों के खिलाफ एनबीडब्ल्यू भी जारी किया गया।
चार आरोपी पूर्व में हो चुके हैं पेश
मामले में वर्ष 2018 में आरोपी कांस्टेबल तोताराम, रघुराज और चालक कांस्टेबल श्रीपाल ने एनबीडब्ल्यू जारी होने पर कोर्ट में सरेंडर कर दिया। आरोपी कांस्टेबल सतेंद्र ने वर्ष 2019 में सरेंडर किया। वर्तमान में ये सभी आरोपी जमानत पर हैं।
चार हुए सेवानिवृत्त
फर्जी मुठभेड़ प्रकरण में कुल आठ पुलिसकर्मी आरोपी बनाए गए। जिनमें से तत्कालीन सिकंदराबाद कोतवाल रणधीर सिंह सीओ होने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके हैं। सिपाही जितेंद्र सिंह ने भी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। कांस्टेबल तोताराम और रघुराज कार्यकाल पूरा होने पर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उपनिरीक्षक संजीव, कांस्टेबल सतेंद्र, श्रीपाल और मनोज ड्यूटी कर रहे हैं।
रोक दी गई सीओ की पेंशन
प्रकरण में सीजेएम न्यायालय ने 17 जनवरी 2020 को मुख्य आरोपी सेवानिवृत्त सीओ रणधीर सिंह की पेंशन पर भी रोक लगाने का आदेश जारी किया था। साथ ही मामले में न्यायालय ने विचारण के दौरान भी विभिन्न एडीजी, एसएसपी और मुख्य सचिव गृह आदि को पत्राचार कर गिरफ्तारी न होने पर नाराजगी व्यक्त की थी।
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न्यायालय ने आरोपियों के खिलाफ एनबीडब्लयू जारी किए थे। उपनिरीक्षक संजीव न्यायालय में हाजिर हो चुके हैं। जबकि, सिपाही जितेंद्र और मनोज को गिरफ्तार किया गया है। जल्द ही आरोपी रणधीर सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। - संतोष कुमार सिंह, एसएसपी
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