पटाखों के धुएं से शहर बना गैस चैंबर
बुलंदशहर। दीपावली पर धुआंधार आतिशबाजी के कारण शुक्रवार को जिले में वायु प्रदूषण का स्तर खतरे के निशान को पार कर गया। शुक्रवार को जिले का एक्यूआई 444 रहा। बीते चार वर्षों में दीपावली के बाद इस बार वायु की गुणवत्ता सबसे ज्यादा खराब है। वायु प्रदूषण के कारण लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी हुई। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद भी पूरे जिले में आतिशबाजी करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
दीपावली पर रोक के बावजूद आतिशबाजी छोड़े जाने से हर क्षेत्र में धुआं फैला रहा। इससे जनपद का वायु प्रदूषण बढ़ गया, शुक्रवार सुबह को तापमान कम होने से धुंध/स्मॉग छाने लगी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के शुक्रवार की एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) रिपोर्ट के मुताबिक बुलंदशहर का एक्यूआई 444 रहा। सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार यूपी में खासकर एनसीआर क्षेत्र से जुड़े हुए सभी बड़े शहर वायु प्रदूषण की चपेट में हैं। पर्यावरण विद राजेंद्र पथिक ने कहा कि वायु प्रदूषण बिगड़ने के लिए खुद जिले के लोग जिम्मेदार हैं। वायु प्रदूषण में जल्द गिरावट नहीं आई तो जिले में गंभीर बीमारी फैल सकती है। इससे बचने के लिए लोगों को पर्यावरण स्वच्छ बनाने में योगदान देना होगा और पौध रोपण करके भी प्रदूषण बढ़ने से रोका जा सकता है।
आसपास के जनपदों से लाए गए पटाखे
जिले में पटाखों की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को देखते हुए लोगों ने आसपास के जनपदों में जाकर पटाखों की खरीद की। लोगों का कहना है कि यदि शासन की तरफ से यह प्रतिबंध और पहले लगाया गया होता तो पटाखों की बिक्री और प्रयोग पर काफी हद तक रोक लग सकती थी। वहीं, जनपद में शासन और एनजीटी द्वारा पटाखों की बिक्री पर रोक के बावजूद पटाखों की खूब बिक्री भी हुई। जबकि पुलिस दिनभर गश्त करती रही, लेकिन पुलिस को कही भी पटाखे बिकते नजर नहीं आए। हालांकि कुछ स्थानों पर पुलिस ने पटाखे बेच रहे लोगों को पकड़ हिरासत में लिया, लेकिन कुछ देर बाद साठगांठ होने पर छोड़ दिया गया।
साल दर साल बढ़ रहा एक्यूआई
वर्ष एक्यूआई
2018 418
2019 320
2020 427
2021 444
हवा स्थिर होने से नहीं छंट पा रहे धूल के कण
वैज्ञानिकों की मानें तो मौसम में बदलाव और स्थिर हुई हवा ने प्रदेश को वायु प्रदूषण और स्मॉग/धुंध की चपेट में ला दिया है। हवा के स्थिर होने (एयर लॉक) से प्रदूषण बढ़ाने वाले धूल व हानिकारक गैसों के कण छंट नहीं पा रहे हैं। इससे हानिकारक कण हवा में बने हुए हैं।
एक्यूआई के मानक
शून्य से 50 - अच्छा
51-100 - संतोषजनक
101-200 - मध्यम
201-300 - खराब
301-400 - बेहद खराब
401-500 - कटोर या खतरा
इस तरह मापा जाता है एयर क्वालिटी इंडेक्स
वायु प्रदूषण मापने के आठ मानक (प्रदूषण तत्व पीएम 2.5, पीएम 10, कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन, सल्फर डाईऑक्साइड, एल्युमिनियम व लेड) होते हैं। प्रदूषण अफसरों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण पीएम 2.5 और पीएम 10 ही होते हैं। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) मापते समय पीएम 2.5, पीएम 10 और किसी एक अन्य मानक को शामिल किया जाता है। इसका केवल स्टैंडर्ड होता है, कोइ मापक इकाई नहीं होती। किसी भी चीज के जलने से जो प्रदूषण होता है, उसमें पीएम 2.5 और धूल के कणों में पीएम 10 होता है।
वायु प्रदूषण से बचाव के उपाय
- मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकलें।
- पेड़ और हरियाली वाले स्थान पर अधिक समय बिताएं।
- दमा-सांस के मरीज बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें।
- सांस लेने में किसी भी तरह की परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सक की सलाह लें।
वातावरण बदलाव के कारण एक्यूआई में लगातार इजाफा हो रहा है। वायु प्रदूषण रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। दीपावली पर आतिशबाजी छोड़े जाने से जिले में वायु प्रदूषण का ग्राफ बढ़ा है। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एनजीटी के निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - सपना श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी
दीपावली पर वायु प्रदूषण तो बढ़ा है लेकिन जनपद के सरकारी अस्पतालों में अवकाश के चलते सांस, दमा आदि का कोई मरीज उपचार के लिए नहीं पहुंचा है। सोमवार को ओपीडी खुलने पर मरीजों के आने पर स्थिति का पता चल सकेगा। लोगों से आवश्यक कार्य के लिए ही घर से बाहर निकलने की अपील की जा रही है। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ