बुलंदशहर। जिले में बुखार, टायफाइड और मलेरिया के बढ़ते प्रकोप के बाद भी निकायों में फॉगिंग के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। रोस्टर बनाने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन न तो रोस्टर लागू किया गया है और न ही कालोनियों और गांवों में फॉगिंग हो रही है, इससे जिले के लोग परेशान हैं।
जिले में बुखार का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। औसतन प्रत्येक घर में दो लोग बुखार, मलेरिया और टायफाइड से ग्रस्त हैं, लेकिन सरकारी आंकड़ों में न तो टायफाइड है और न ही मलेरिया के आंकड़े बढ़ रहे हैं। शासन ने नगर और देहात में रोस्टर बनाकर फॉगिंग के आदेश तो दिए थे, लेकिन इनका पालन नहीं हो रहा है। नगर में फॉगिंग तो कराई जा रही है, लेकिन अधिकारियों और बड़े जनप्रतिनिधियों के घरों के आसपास तक ही सीमित है। कीटनाशक का छिड़काव करने के नाम पर भी खानापूर्ति कर ली गई है। बताया जा रहा है कि नगर पालिका बुलंदशहर में फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव के लिए पांच लाख से अधिक का बजट खर्च किया जा चुका है, लेकिन न तो रोस्टर के बारे में अधिकारी जानकारी दे पा रहे हैं और न ही अभी तक सभासदों को रोस्टर उपलब्ध कराया गया है।
बोर्ड बैठक में भी जमकर हुआ था हंगामा
चार दिन पहले नगर पालिका बोर्ड की बैठक में सभासदों ने रोस्टर को लेकर जमकर हंगामा किया था। सभासदों ने मांग की थी कि फॉगिंग के रोस्टर को सार्वजनिक किया जाए, लेकिन अभी तक अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया है। अधिकतर कालोनियों में फॉगिंग की ही नहीं है, जबकि कुछ कालोनियों में केवल एक बार फॉगिंग करके खानापूर्ति कर ली गई है।
देहात में भी कागजों में बढ़ रहे आंकड़े
गांवों में भी फॉगिंग और कीटनाशक के छिड़काव के आंकड़े केवल कागज तक ही सीमित हैं। स्थिति यह है कि 500 से अधिक गांवों में एक बार भी फॉगिंग नहीं की गई है। जबकि ब्लॉक अधिकारी लगातार फॉगिंग किए जाने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज रहे हैं।
रोस्टर बनाकर फॉगिंग कराने के निर्देश दिए हैं। यदि कहीं पर लापरवाही बरती जा रही है, तो इसकी शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. प्रशांत कुमार, एडीएम प्रशासन