बुलंदशहर। कोतवाली देहात की तत्कालीन रिपोर्टिंग चौकी चोला के गांव बीघेपुर में दो जनवरी 2012 को गांव निवासी रामपाल की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। प्रकरण में एडीजे द्वितीय सुरेश कुमार शर्मा के न्यायालय ने गांव निवासी अभियुक्त मनोज व प्रभात को दोषी माना है। प्रभात कोर्ट में पेश नहीं हुआ। इसके चलते बुधवार को अभियुक्त मनोज को ही आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। जबकि, प्रभात की गिरफ्तारी के निर्देश पुलिस को दिए गए हैं।
वादी मुकदमा जबर सिंह ने दो जनवरी 2012 को कोतवाली देहात में तहरीर देकर बताया था कि उनके पिता रामपाल सिंह दोपहर करीब एक बजे खेत पर ही मौजूद थे। वादी भी वहां से कुछ दूरी पर ही दूसरे खेत पर थे। तभी पीड़ित ने गोली की आवाज सुनी। जब वह मौके पर पहुंचे तो उनके पिता रामपाल सिंह लहूलुहान अवस्था में खेत में पड़े हुए थे। उनके माथे और हाथ से काफी खून बह रहा था। दो लोग हाथ में हथियार लहराते हुए दूसरे खेत की ओर से भाग रहे थे। अस्पताल पहुंचाने पर चिकित्सकों ने उनके पिता को मृत घोषित कर दिया था। पुलिस ने मामले में तहरीर के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
इस दौरान गांव निवासी आरोपी मनोज, प्रभात व मांगेराम का नाम प्रकाश में आया था। पुलिस ने जांच पूरी कर तीनों के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर न्यायालय में दाखिल कर दी थी। बीते दिनों मामले के विचारण के दौरान ही अभियुक्त मांगेराम की मौत हो गई थी। मंगलवार को दोनों पक्षों के गवाहों के बयानों और साक्ष्यों का अवलोकन कर न्यायालय ने अभियुक्त मनोज और प्रभात को दोषी करार दिया था। अभियुक्त प्रभात इससे पूर्व ही भाग गया था। कोर्ट ने मनोज को जेल भेज दिया था। न्यायालय ने बुधवार को सजा की तारीख तय की थी लेकिन प्रभात बुधवार को भी अदालत में प्रस्तुत नहीं हुआ। जबकि, मनोज को कोर्ट में पेश किया गया।