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Bulandshahar News: रामकाज के लिए उमड़ी भीड़ के आगे जेल पड़ गई थी छाेटी

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बुलंदशहर। जिस पल का लंबे समय से इंतजार था, वह पल अब आ गया है। 1990 में देखा गया राम मंदिर बनने का सपना अब पूरा हो रहा है। ढांचा ढहाए जाने से लेकर प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण एवं प्राण प्रतिष्ठा के हम साक्षी बन रहे हैं। ये बातें राम मंदिर आंदोलन में कार सेवकों के साथ शामिल रहे सदर तहसील के गांव नैथला हसनपुर निवासी जेके तिवारी ने कही। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में नैथला हसनपुर के कार सेवकों ने बड़ी भूमिका निभाई थी। अयोध्या पहुंचने के आह्वान पर नगर के शहीद चौक से गांव के 44 लोगों को गिरफ्तार कर अस्थाई जेल में बंद कर दिया गया था।
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1990 में लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा 30 अक्तूबर को अयोध्या पहुंचनी थी लेकिन, लालकृष्ण आडवाणी बिहार में 23 अक्तूबर को गिरफ्तार कर लिए गए तो बुलंदशहर तक उसका असर हुआ। आंदोलन का हिस्सा रहे जितेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक और पदाधिकारियों को अयोध्या की राम ज्योति घर-घर पहुंचाने की जिम्मेदारी मिली। सभी कार्यकर्ता वेष बदलकर घर-घर राम ज्योति ले जा रहे थे। इसी बीच अयोध्या से बुलावा आ गया। जिले में भगवा ध्वज लिए और भगवा कपड़ा पहने व्यक्ति को पुलिस पकड़कर पुलिस लाइन ले जाती था। हालत यह थे कि अयोध्या रवाना होने वाले कारसेवक भगवा रंग का वस्त्र थैले में रखकर ले जाने लगे। 23 अक्तूबर को लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा रोके जाने पर शहर से लेकर गांव तक रामभक्तों का जुलूस अयोध्या जाने को बेताब था।
रामभक्त अयोध्या को कूच करने लगे लेकिन, शहर के कालाआम स्थित शहीद चौक पर अयोध्या जाने वाले लोगों को गिरफ्तार कर लिया जा रहा था। नैथला गांव से पहला जत्था 24 अक्तूबर को निकला। इसमें 10 साल के दो बच्चे समेत 21 कार सेवक शामिल थे। हम सभी को कालाआम चौराहा स्थित शहीद चौक से पुलिस ने गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेज दिया था। इसके बाद सहारनपुर के रामपुर मनिहारन स्थित कृषि इंटर कॉलेज में बनाए गई अस्थाई जेल में 14 दिन तक रखा। हम सभी की गिरफ्तारी होने पर 25 अक्तूबर को 23 सदस्यों का दूसरा जत्था गांव से निकला। इन्हें भी शहीद चौक से गिरफ्तार कर सहारनपुर के गुरु नानक इंटर कॉलेज में बनी अस्थाई जेल में 13 दिन तक रखा। वहां से वापस लौटने पर शहर में सभी का स्वागत किया गया।
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रामकाज में सहभागिता मेरा सौभाग्य
आंदोलन के समय रोहित तिवारी की उम्र 10 साल थी। वह अपने चाचा-ताऊ के साथ आंदोलन में शामिल हुए। वर्तमान में वह बदायूं परिषदीय विद्यालय में शिक्षक हैं। रोहित तिवारी ने बताया कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है तो ऐसा लग रहा है कि मानो वर्षों का संकल्प पूरा हो गया। श्रीराम के कामकाज में मेरी भी छोटी सी आहुति हुई थी। इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है। बताया कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बुलावा आए या न आए लेकिन, रामलला का स्थापित होना बेहद खुशी की बात है।
ये कारसेवक रहे शामिल
पहले जत्थे में ऋषि लाला, संतोष पंडित, जितेंद्र कुमार तिवारी, मनोज भारद्वाज, कृष्ण कांत, रमेश शर्मा, ललित गुप्ता, सुंदर लाल फौजी, सुशील शर्मा, कुलदीप शर्मा, मनोज शर्मा, प्रभु शंकर, भीमसैन शर्मा, पंकज शर्मा, अखलेश, मुकेश, मुन्ना लाल, दिनेश चंद, रोहित तिवारी, मुकेश शर्मा व राकेश शामिल रहे। दूसरे जत्थे में शिवकुमार शर्मा, शीलेष शर्मा, दीपक शर्मा, हिमांशु कौशिक, सुभाषचंद शर्मा, भगवत स्वरूप शर्मा, कुलदीप गुप्ता, मनोज शर्मा, कुमरेश शर्मा, चिदानंद भारद्वाज, मनोज शर्मा, हरिओम शर्मा, मनोज शर्मा, ललित शर्मा, अवनीश कुमार, जितेंद्र शर्मा, दिनेश शर्मा, दिजेंद्र शर्मा, भूपेश शर्मा, सुभाष शर्मा व गिरीश चंद्र शर्मा शामिल रहे।
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