बुलंदशहर। घटनास्थल पर बैठे देवीराम फूट-फूटकर रो रहे थे। इस हादसे ने उनका पूरा संसार उजाड़ दिया। दो बेटियों और एक बेटे की मौत हो गई। धेवती अभी लापता है। एक बेटी की मुश्किल से जान बची है। देवीराम के पांच बच्चों में से चार बरात में जाने के लिए निकले थे। सबसे छोटे बेटा इस साल 12वीं में है। परीक्षा की वजह से वह घर पर ही था।
गांव शेरपुर निवासी देवीराम अपनी पांच संतानें थीं। बड़ी बेटी कांता और दूसरे नंबर की बेटी मनीषा की शादी हो चुकी थी। एक पुत्री अंजलि और बेटा मनीष स्नातक कर रहे थे। सबसे छोटा बेटा बारहवीं की परीक्षा दे रहा है। ममेरे भाई रॉबिन की शादी का उल्लास उनके परिवार में भी था। पूरा परिवार हंसी-खुशी शादी में शामिल था। उनका उल्लास घर से बरात निकलने के कुछ देर बाद ही गम में बदल गया। बरात विदा हुई तो देवीराम मामा राम सिंह के साथ थे। उनकी तीन बेटियां कांता, अंजलि और मनीषा, बेटा मनीष और छह वर्षीय धेवती रिया एक कार में सवार होकर बरात के लिए निकलीं। उन्हें क्या पता था कि आज उनके परिवार के तीन सदस्यों का यह अंतिम सफर होगा।
कैलाश के पास थे दुल्हन के गहने और दो लाख रुपये कैश
हादसे में मौत के शिकार हुए कैलाश के पास दो लाख रुपये की नकदी और दुल्हन को देने के लिए सोने-चांदी के गहने थे। हादसे के बाद पुलिस ने तीन शव बाहर निकाले लेकिन कैलाश का शव नहीं मिला था। उम्मीद थी कि नकदी व जेवरात उनके साथ बैग में होंगे। सोमवार दोपहर कैलाश का शव तो मिल गया लेकिन सामान नहीं मिला।
दूल्हे का परिवार 35 वर्ष से रह रहा था शेरपुर में
दूल्हे रॉबिन के पिता राम सिंह मूलरूप से छतारी थाना क्षेत्र के गांव चौंढेरा पंड्रावल के निवासी हैं। शेरपुर में उनकी रिश्तेदारी थी। करीब 35 साल पहले राम सिंह परिवार के साथ शेरपुर में बस गए थे।