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बाबूजी कहते थे ... मेरी कर्मभूमि है बुलंदशहर

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पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का फाइल फोटो। - फोटो : BULANDSHAHR
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बाबूजी कहते थे ... मेरी कर्मभूमि है बुलंदशहर
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बुलंदशहर/डिबाई/नरौरा। अलीगढ़ मेरी जन्मभृूमि है और बुलंदशहर मेरी कर्मभूमि। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने यह शब्द 16 जुलाई 2016 को बुलंदशहर में एक जनसभा में कहते तो जनसमूह के साथ वह खुद भी भावुक हो गए थे। इसी लगाव की वजह से बाबूजी अपने अंतिम सफर पर भी बुलंदशहर के नरौरा से ही निकलेंगे।
कल्याण सिंह मूलरूप से अलीगढ़ जिले के रहने वाले थे। कल्याण सिंह जब कभी भी जिले में आते तो बहुत खुश होते थे। यहां के नेता बताते हैं कि वह बेहद अपनेपन से मिलते। स्याना विधायक देवेंद्र लोधी बताते हैं कि वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में कल्याण सिंह ने डिबाई विधानसभा सीट से विधायक का चुनाव लड़ा तो विपक्ष में उतरे बसपा प्रत्याशी अनिल कुमार से उन्हें चार गुना अधिक मत प्राप्त हुए थे। तब बाबूजी को 59404 मतों से विजेता घोषित किया गया था। बाद में कल्याण सिंह ने डिबाई विधानसभा सीट छोड़ दी थी और उप चुनाव में राम सिंह को मैदान में उतारकर तीसरी बार विधायक बनाया था। भाजपा छोड़ने के बाद जब उन्होंने 2002 में राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाकर डिबाई से अपने पुत्र राजू भैय्या को मैदान में उतारा तब भी लोगों ने कल्याण सिंह को ही प्रत्याशी मानकर बड़े अंतर से राजू भैय्या को जिताकर विधानसभा भेजा था।
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2004 में बुलंदशहर से बने थे सांसद
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में जिले में हर ओर कल्याण सिंह को लेकर ही लोग चर्चाएं करते थे। पहली बार जिले में लोकसभा चुनाव लड़ रहे कल्याण सिंह को जनता से भारी समर्थन दिया और उन्हें जिताकर लोकसभा भेजा। इस दौरान कल्याण सिंह को कुल 258284 मत मिले थे, तो वहीं रालोद प्रत्याशी बदरूल इस्लाम को 241633 मत मिले थे। जिसके चलते 16651 मतों से जीतकर कल्याण सिंह सांसद बने थे।
घर आया हूं, राजनीतिक चर्चा नहीं करूंगा
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह सादा जीवन उच्च विचार वाले राजनेता थे। वर्ष 2017 में वह बुलंदशहर में मेरठ बस स्टैंड के पास स्थित अपने आवास पर आए थे। इस दौरान उन्होंने खुद को मीडिया से बिल्कुल दूर रखा था। उन्होंने कहा था कि मैं किसी कार्यक्त्रस्म में नहीं बल्कि अपने घर आया हूं। और घर आने के दौरान कोई राजनीतिक चर्चा या चकाचौंध नहीं होनी चाहिए। क्योंकि जब कोई व्यक्ति घर आता है तो वह आराम करने के लिए आता है।
जेल से छूटते ही गुलावठी में की थी सभा
गुलावठी। वरिष्ठ भाजपा नेता रमेश चंद जैन ने बताया कि अयोध्या में बाबरी विध्वंस के बाद कल्याण सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था तथा वह एक दिन जेल में रहे थे। एक दिन जेल में रहने के बाद कल्याण सिंह ने गुलावठी में शहीद स्मारक पर एक सभा की थी। इसके अलावा बुलंदशहर लोकसभा चुनाव के दौरान कल्याण सिंह भाजपा के प्रत्याशी थे। उन्होंने रामलीला मैदान में एक चुनावी सभा की थी। संचालन रमेश चंद जैन ने किया गया। वहीं, समाजसेवी संजीव कंसल ने बताया कि करीब 15 वर्ष पूर्व कल्याण सिंह को पुरानी मंडी में व्यापारियों ने सिक्कों से तौला था। उस समय कल्याण सिंह ने उनके छोटे पुत्र सार्थक कंसल को आशीर्वाद दिया। वहीं, लोकतंत्र रक्षक सेनानी एवं वरिष्ठ भाजपा नेता नरेश चंद गुप्त ने बताया कि कल्याण सिंह को गुलावठी से काफी लगाव था। वह अनेकों बार गुलावठी आए तथा कार्यकर्ताओं से उनकी समस्याएं पूछते रहते थे।
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छोटे से छोटे कार्यकर्ता को नाम से जानते थे बाबू जी
औरंगाबाद। 1992 से 2015 तक कल्याण सिंह अनेकों बार औरंगाबाद आये। राजकुमार लोधी ने बताया कि वह हमेशा छोटे से कार्यकर्ता को नाम से जानते थे। संघ से जुड़े पूर्व चेयरमैन दुलीचंद सैनी, पूर्व चेयरमैन स्वर्गीय हरि सिंह लोधी के पुत्र पीतम सिंह, पूर्व चेयरमैन राजकुमार लोधी ,लोकतंत्र सेनानी स्वर्गीय मदन गोपाल विमल के पुत्र डॉक्टर राजेश गोयल ने उनके साथ संस्मरणों को याद किया। ये सभी चर्चित नाम थे जिनकी उनके अक्सर भेंट होती रहती थी।
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