हत्या के दोष से बरी होकर सात साल बाद पहुंचे घर
नरौरा। परिजनों की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट के बरी के आदेश पर शनिवार रात घर पहुंचे लोग भावुक हो गए। कुछ देर घर रुके और गांव के कुछ लोगों से बातचीत के बाद दोनों लोग अपनी रिश्तेदारी में चले गए, जबकि एक युवक अलीगढ़ में अपने परिवार के पास पहुंचा।
नरौरा क्षेत्र के गांव पिलखना में 23 जनवरी 2014 की रात्रि को गांव के बाहर स्थित बड़े अहातेदार में मौसम खां (85), असगरी देवी (82), शौकीन खां (55), मुस्कान (15) व समद (8) की धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड के बाद मृतक के बेटे अलीशेर ने संपत्ति विवाद का आरोप लगाते हुए भाई मोवीन, उसकी पत्नी नाजरा, चाचा जैकब व चाचा के पुत्र साजिद को नामजद करते हुए हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले में 11 जनवरी 2016 को एडीजे न्यायालय बुलंदशहर द्वारा मोवीन, जैकब व साजिद को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसके बाद फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी। हाईकोर्ट ने भी जिला न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई और सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेशों को पलटते हुए तीनों दोषियों को बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश मिलने पर तीनों को आगरा जेल से रिहा किया गया तो शनिवार देर रात जैकब और साजिद गांव पिलखना स्थित अपने घर पहुंचे। इस दौरान वह भावुक हो गए और अपने पुराने दिनों को याद करने लगे। बाद में वह रात में ही अपनी किसी रिश्तेदारी के घर चले गए। जबकि मोविन अलीगढ़ में अपनी पत्नी और बच्चों के पास पहुंचा।
पिलखना गांव के लोगों का कहना है कि घटना को भले ही सात साल हो गए हों, लेकिन उस घर के सामने से निकलते हैं तो घटना की याद ताजा हो जाती है। जिस तरह से घटना को अंजाम दिया गया था, उसके बाद घर की स्थिति देखने लायक नहीं थी। घर के अंदर चारो तरफ खून ही खून था। गांव के छोटे बच्चे और महिलाओं ने उस घर की तरफ से जाना ही बंद कर दिया था। अभी भी रात में लोग वहां से निकलने में डरते हैं।
पिलखना गांव के लोगों ने कहा कि गांव शांति सौहार्द के लिए जाना जाता था, लेकिन इस घटना के बाद से गांव पर एक कलंक लग गया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है। कम से कम गांव से एक कलंक हट गया है कि परिवार के व्यक्ति ने ही अपनों की हत्या नहीं की है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं।