मामला तूल पकड़ने पर 26 दिन बाद दर्ज हुआ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का मुकदमा
औरंगाबाद। किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस हरकत में आई और 26 दिन बाद मंगलवार को मुकदमा दर्ज किया। सामूहिक दुष्कर्म, हत्या समेत विभिन्न धाराओं में तीन आरोपियों को नामजद किया गया है। सीओ सिटी शशांक सिंह गांव भी पहुंचे और पीड़ित परिजनों से घटना की जानकारी ली। पूरे मामले में थाना प्रभारी की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है।
औरंगाबाद थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी की मां का आरोप है कि 12 मई को उसकी 13 वर्षीय पुत्री घर पर अकेली थी। उसी दौरान गांव की ही एक लड़की और उसके दो रिश्तेदार घर पहुंचे। युवको ने किशोरी को कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। इसके बाद नशे की हालत में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वह जब घर पहुंची तो किशोरी बदहवास स्थिति में मिली। इलाज के दौरान 18 मई को उसकी मौत हो गई। औरंगाबाद थाने में तहरीर देने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर परिजनों ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल से न्याय की गुहार लगाई थी। स्वाति मालीवाल ने छह जून को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सभी आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की धाराओं में एफआईआर दर्ज करने और लापरवाही बरतने वाले थानेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा था।
स्वाति मालीवाल के पत्र लिखने के बाद सोमवार देर रात औरंगाबाद पुलिस हरकत में आ गई। मृतका की मां की शिकायत के आधार पर आरोपी युवक निखिल निवासी गांव कुर्थला थाना भूड़ जिला मेवात (हरियाणा), शुभम उर्फ शिवम निवासी गांव खटाना थाना जारचा नोएडा के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म करने और गांव निवासी आरोपी युवती पर दरवाजे पर निगरानी रखने के साथ पीड़िता के चीखने चिल्लाने पर उसे जबरन जहरीला पदार्थ खिलाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 9 जगह मिले चोट के निशान
किशोरी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 9 जगह चोंटो के निशान मिले हैं। रिपोर्ट दुष्कर्म की ओर भी इशारा कर रही है। हालांकि मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम करने वाले मेरठ के चिकित्सकों का कहना है कि जहर खाने और शराब पीने से मौत होने के ज्यादातर मामलों में मौत का कारण स्पष्ट नही हो पाता है। फोरेंसिक रिपोर्ट से ही मौत का सही कारण स्पष्ट हो सकता है।
26 को आई थी पोस्टमार्टम रिपोर्ट
किशोरी की मौत होने के एक सप्ताह बाद यानी 26 मई को ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट औरंगाबाद थाने आ गई थी। थानेदार ने उसे छुपाकर अपने पास रख लिया। 28 मई को परिजन मेरठ मेडिकल में पहुंचे और दोबारा रिपोर्ट निकलवाकर उसी दिन थानेदार से मिले। रिपोर्ट का हवाला देते हुए हत्या और सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज करने की मांग की, लेकिन थानेदार ने यह कहकर उन्हें भगा दिया कि जब तक बिसरा रिपोर्ट नहीं आ जाएगी, तब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। एसएसपी से शिकायत करने की बात पर थानेदार ने धमकी भी दी कि कहीं भी शिकायत कर लो, कुछ नही बिगाड़ सकते हो।
थानेदार ने अधिकारियों को किया गुमराह
किशोरी के परिजनों के मुताबिक 12 मई को वारदात हुई। 15 मई को घटना की तहरीर दी। पुलिस ने एफआईआर तो दूर घटनास्थल पर जाना भी उचित नहीं समझा। 18 मई को किशोरी की मौत हो गई। 19 मई को फिर तीन आरोपियों को नामजद करते हुए तहरीर दी गई। 24 मई में तत्कालीन एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने थानेदार से घटना की बाबत जानकारी ली, लेकिन थानेदार ने उन्हें गुमराह कर दिया। चार दिन पहले भी किशोरी की मां नवागत एसएसपी श्लोक कुमार से मिली थी। उन्हें भी थानेदार ने गुमराह किया। सोमवार शाम तक थानेदार पोस्टमार्टम रिपोर्ट न आने की बात कहकर अधिकारियों को गुमराह कर रहे थे।
मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। विभिन्न पहलूओं पर गहनता से जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। साथ ही वारदात का राजफाश भी कर दिया जाएगा। - श्लोक कुमार, एसएसपी