अब इसे साहब की भूल कहें या लापरवाही, साहब को आम आदमी के जनसूचना अधिकार की परवाह नहीं है। मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक आरटीआई के 158 प्रार्थना पत्रों का जवाब कई विभाग के अफसरों ने नहीं दिया है। मामले में गंभीरता बरतते हुए बृहस्पतिवार को राज्य सूचना आयुक्त आरटीआई की समीक्षा करेंगे, जिसके चलते कई विभागों के अफसरों की सांसंे अटकी हुई है।
सूचना अधिकार अधिनियम के तहत 30 दिन के भीतर सरकारी मशीनरी से जुड़ी सूचना देने का प्रावधान है। इसके बावजूद अफसर आरटीआई का जवाब तय समय सीमा के भीतर नहीं देते हैं।
आरटीआई का जवाब नहीं देने में सबसे आगे माध्यमिक शिक्षा विभाग, पंचायत राज विभाग, पावर कारपोरेशन और नगर निकाय हैं। काजमपुर देवली में ग्राम प्रधान ने पंचायत सचिव से गांव मेें कराए गए विकास कार्यों की सूचना मांगी है।
अब तक डीपीआरओ ने इस संबंध में कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई है। सूचना नहीं मिलने के कारण गांव में विकास कार्य भी रुक गए हैं। यह तो महज एक उदाहरण मात्र हैं ऐसे 158 प्रार्थना पत्र साहब की फाइल में दबे हुए हैं।