रास्ता संकरा होने के कारण नहीं निकल सके मजदूर
खुर्जा। फैक्टरी के जिस हिस्से में छत गिरी, वहां से निकलने का रास्ता काफी संकरा था। छत गिरते ही वहां भगदड़ मच गई। इसके कारण मजदूर वहां से निकल नहीं सके। घटनास्थल पर मलबे में दबे मजदूरों के परिजन दिनभर अपनों को बचाने के लिए भटकते रहे।
बुर्ज उस्मान मोहल्ला निवासी विनोद फैक्टरी में ही काम करते हैं। उन्होंने बताया कि घटना के दौरान फैक्टरी के अंदर 30 से ज्यादा मजदूर मौजूद थे। छत गिरने की आवाज सुनकर सभी जान बचाकर बाहर भागे। यदि पूरी छत गिर जाती तो कई लोगों की जान चली जाती। वहीं मजदूर भूवनेश्वर ने बताया कि छत गिरने की खबर मिलते ही अंदर काम कर रहे मजदूर जान बचाकर भागने लगे। अंदर जहां छत गिरी थी, वहां रास्ता छोटा था। ऐसे में मजदूरों की भीड़ तेजी से बाहर दौड़ पड़ी। सुबह की शिफ्ट में काम करने पहुंची सुनीता को बाहर निकलने की जगह नहीं मिल सकी। इतने में कट्टों का ढेर उस पर गिर गया।
नगर क्षेत्र के मोहल्ला अहीरपाड़ा निवासी सुनीता (55) की बड़ी पुत्री का नाम भी सुनीता ही है। उसने बताया कि उसकी मां गत 12 वर्षों से फैक्टरी में काम कर रही है। वह प्रतिदिन सुबह आठ बजे वाली शिफ्ट में काम करने के लिए घर से निकलती थी और शाम को घर पहुंचती थी। परिवार सुनीता के दो पुत्र, एक पुत्री सुनीता, सास और पति हैं। सुनीता की पुत्री ने बताया कि उसके पिता की नौकरी नहीं है। उनकी मां ही कमाती है और घर चलाती है। शुक्रवार सुबह सूचना मिली की फैक्टरी में हुए हादसे में मलबे के नीचे उसकी मां दब गई है। दिन भर मां के बाहर निकलने की उम्मीद करते रहे, लेकिन शाम तक भी कुछ नहीं मिला। सुनीता की सास केला देवी फैक्टरी के बाहर रोती-बिलखती रही। अधिकारी और पुलिसकर्मी आपस में बात कर रहे थे। इसी दौरान केला देवी ने हाथ जोड़कर बोला कि बात करने में समय बर्बाद न करें और उनकी बच्ची को बाहर निकालें। तब वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनको शांत कराया।
घटना के ढाई घंटे बाद पहुंचे अधिकारी
घटना सुबह 9:15 बजे की है। जिलाधिकारी सीपी सिंह और एसएसपी सुनील कुमार सिंह दोपहर को 12 बजे घटना स्थल पर जांच करने पहुंचे। वहीं स्थानीय एसडीएम लवी त्रिपाठी भी 11.45 पर पहुंचीं।
पॉटरी मजदूरों ने किया प्रदर्शन
पॉटरी इलाके के बाहर पुलिस ने मजदूरों का प्रवेश रोक दिया था। वहीं फैक्टरी में काम करने वाले मजदूरों के परिजन घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे तो उनको अंदर नहीं जाने दिया। ऐसे में गुस्साए मजदूरों ने प्रदर्शन किया।