दिल के डॉक्टर का पता नहीं, खून की जांच कर रहे संविदाकर्मी
बुलंदशहर। चालीस लाख की आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा उठाने वाले जिला अस्पताल में गंभीर रोगों के इलाज की व्यवस्था भगवान भरोसे है। मानक के अनुसार बमुश्किल 50 फीसदी चिकित्सक व कर्मी ही सेवा में मौजूद हैं। हार्ट, सर्जन, चेस्ट फिजीशियन के पद वर्षों से रिक्त चल रहे हैं। और तो और खून की जांच के लिए स्थाई पैथोलॉजिस्ट तक नहीं हैं। जांच का काम संविदाकर्मियों के भरोसे चल रहा है। इन दिनों अस्पताल में प्रतिदिन 500-600 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं।
एक तरफ प्रदेश सरकार कोरोना संक्रमण को लेकर सीएचसी-पीएचसी समेत सभी सरकारी चिकित्सालयों पर व्यवस्था सुधारने की पहल कर रहा है। वहीं, जिला मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन मरीजों की भारी भीड़ लग रही है। इसके बावजूद काफी समय से 14 विशेषज्ञों की तैनाती न मिलने से अस्पताल जूझ रहा है। जो हैं भी उनसे दूसरा कार्य लिए जाने व अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों के न होने से मरीजों को सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
177 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में हैं मात्र 87 कर्मी
जिला अस्पताल में 177 बेड की क्षमता है। अस्पताल की ओपीडी से लेकर वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए 143 स्वास्थ्य कर्मियों के पद स्वीकृत हैं। 143 के सापेक्ष जिला अस्पताल में महज 87 पद पर चिकित्सक समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी तैनात है और 56 पद काफी समय से रिक्त चल रहे हैं। इसमें 10 सिस्टर, पांच स्टाफ नर्स, डेंटल हाइजेनिस्ट, इलेक्ट्रीशियन, लिपिक, पांच वार्ड ब्वॅाय और छह सफाई कर्मचारी भी शामिल हैं।
इमरजेंसी भी चल रही रामभरोसे
जिला अस्पताल में इमरजेंसी सेवाओं के लिए चार ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) के पद स्वीकृत हैं। अस्पताल में चारों पद काफी समय से रिक्त चल रहे हैं। पूर्व में अस्पताल प्रशासन द्वारा दो ईएमओ सीएमओ के यहां से लिए गए। अब फिलहाल एक ईएमओ की सेवा अस्पताल प्रशासन ले रहा है। बाकी पद रिक्त होने से मौजूद विशेषज्ञों को ड्यूटी दे दी जाती है। इससे ऑपरेशन समेत अन्य सर्जरी और ओपीडी सेवा प्रभावित हो रही है।
ब्लड बैंक में नहीं है एक भी नियमित कर्मी
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में शासन द्वारा 19 पद स्वीकृत है। लेकिन सभी पद काफी समय से रिक्त चल रहे हैं। इसमें वरिष्ठ पैथेलॉजिस्ट, चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टैक्नीशियन, कनिष्ठ सहायक, लैब असिस्टेंट और पीआरओ के पद शामिल हैं। नियमित अधिकारी और कर्मी न होने पर संविदा कर्मियों से कार्य लिया जा रहा है।
विशेषज्ञ और रिक्त पद
पदनाम स्वीकृत रिक्त पद
कार्डियोलॉजिस्ट 01 01
पैथोलॉजिस्ट 02 02
सर्जन 02 02
बाल रोग विशेष 02 01
रेडियोलॉजिस्ट 02 01
आर्थोपेडिक सर्जन 02 02
ईएमओ 04 04
अधीक्षक/प्रभारी भंडार 01 01
फिजीशियन 02 01
चीफ फार्मेसिस्ट 04 01
निश्चेतक 02 00
ईएनटी सर्जन 01 00
डेंटल सर्जन 01 00
नेत्र सर्जन 02 00
चर्म रोग विशेषज्ञ 01 00
चेस्ट फिजिशियन 01 00
कुल पद 30 16
सोमवार को 1,247 ने कराया प्राथमिक उपचार
जिला अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को 1,247 लोगों ने पंजीकरण कराया। इनमें से अधिकांश लोगों को विशेषज्ञ न होने पर बैरंग लौटना पड़ा।
नहीं मिले सर्जन
सर्जन को दिखाने के लिए अस्पताल में आई थी। आज उनके बैठने का दिन भी होने के कारण ओपीडी कक्ष खाली रहा। - हेमलता
जाना पड़ता है निजी चिकित्सालय
अस्पताल में जब भी जाते हैं, विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं मिलते हैं। विशेषज्ञों के न होने के कारण मजबूरन निजी अस्पताल में उपचार कराना पड़ता है। - ममता लोधी
अस्पताल में पिछले काफी समय से विशेषज्ञों की कमी चल रही है। रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए कई बार शासन को पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है। इमरजेंसी सेवाएं भी बाधित हो रही हैं। फिलहाल जो संसाधन उपलब्ध हैं उन्हीं से मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. राजीव प्रसाद, सीएमएस