खुर्जा। देहात थाना क्षेत्र के दिनौल गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की लापरवाही से कक्षा एक का छह वर्षीय छात्र डेढ़ घंटे तक स्कूल में बंद रहा। बंद कमरे में गर्मी से बेहाल बच्चा अंधेरे में रोता-बिलखता रहा।
स्कूल के पास से गुजर रहे ग्रामीण ने रोने की आवाज सुनी तो परिजनों की मदद से ताला तोड़कर बच्चे को बाहर निकाला। ग्रामीणों ने स्कूल के बाहर हंगामा किया।
इस मामले में बीएसए वीरेंद्र कुमार सिंह ने प्रधानाध्यापक मुकेश राणा और तीन सहायक अध्यापक सीमा रानी, अंशुमान निरंजन, सीमा को निलंबित कर दिया है। शिक्षामित्र मनोरमा के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।
दिनौल गांव निवासी सोनू ने बताया कि उनकी नौ वर्षीय बेटी देविका गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में चौथी कक्षा में पढ़ती है। इसी साल उन्होंने अपने छह वर्षीय बेटे सोयम का दाखिला पहली कक्षा के लिए कराया था, लेकिन बच्चे का अभी पंजीकरण नहीं हुआ था।
बच्चा शुरुआती तौर पर ही स्कूल में पढ़ने जा रहा था। रोजाना की तरह दोनों भाई बहन शुक्रवार को भी स्कूल गए थे।
दोपहर एक बजे छुट्टी होने के बाद देविका घर आ गई। सोनू व उनकी पत्नी खेत पर मजदूरी करने गए थे। ग्रामीण दिनेश ने बताया कि दोपहर ढाई बजे करीब वह खेत से अपने घर जा रहे थे, तो स्कूल के अंदर से बच्चे के रोने की आवाज आ रही थी।
बाहर से दरवाजा बंद था तो वह अंदर नहीं जा सके। उन्होंने ग्रामीणों को सूचना दी। सूचना पर सोनू व उनकी पत्नी भी स्कूल पहुंचे तो देखा कि उनका ही बेटा सोयम अंदर बंद है।
ग्रामीण व सोनू दीवार कूदकर परिसर के अंदर गए और कमरे का दरवाजा तोड़कर बच्चे को बाहर निकाला। बच्चा अपने मां बाप को देखकर फूट-फूटकर रोने लगा और उनसे लिपट गया। यह देख मां बाप भी रोने लगे।
ग्रामीणों ने पुलिस व अन्य अधिकारियों को सूचना दी। जानकारी मिलते ही प्रधानाध्यापक मुकेश राणा पहुंचे और अपनी गलती स्वीकार की।
तहसीलदार सचिन वर्मा व खंड शिक्षा अधिकारी अमित कुमार गुप्ता भी मौके पर पहंचे। बच्ची देविका का कहना है कि स्कूल की छुट्टी के बाद अक्सर सोयम गांव में अपने दोस्तों संग खेलने चला जाता था। इसलिए उसने भी घर पहुंच कर ध्यान नहीं दिया।
कोट :-
मामले की जानकारी मिली है। यह लापरवाही माफ करने योग्य नहीं है। प्रधानाध्यापक और तीन सहायक अध्यापकों को निलंबित कर दिया गया है। शिक्षामित्र के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही जांच रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भी भेजी जाएगी। - वीरेंद्र कुमार सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी, बुलंदशहर