खतरे के निशान के करीब पहुंचा जलस्तर
नरौरा। हरिद्वार और बिजनौर बैराज से नदी में छोड़ी जा रही अतिरिक्त जलराशि के कारण नरौरा बैराज पर पिछले 48 घंटे में जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। गंगा का जलस्तर जहां बुधवार को मीडियम फ्लड की श्रेणी में था, वहीं, बृहस्पतिवार को यह खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। गत चौबीस घंटे में जलस्तर में करीब तीस हजार क्यूसेक पानी की वृद्धि आंकी गई है।
सिंचाई विभाग हेड वर्क्स के एसडीओ अंकित सिंह ने बताया कि बुधवार की दोपहर में बैराज पर कुल पानी की आवक 1,91,414 क्यूसेक प्रति सेकेंड हो रही थी। जबकि, बैराज नदी की डाउन स्ट्रीम में 1,89,888 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। शाम को दो घंटे से बैराज पर जलस्तर स्थिर बना हुआ है। बृहस्पतिवार को बैराज पर कुल पानी की आवक बुधवार की अपेक्षा बढ़कर 2,23,781 क्यूसेक प्रति सेकेंड हो गई है। बैराज से नदी की डाउन स्ट्रीम में 2,22,554 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। जबकि, मंगलवार को बैराज पर कुल पानी की आवक मात्र 32 हजार क्यूसेक हो रही थी। बैराज पर ढाई लाख क्यूसेक पानी की उपलब्धता होने पर जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंच जाता है। बृहस्पतिवार को हुई जल की वृद्धि खतरे के निशान के काफी करीब पहुंच चुकी है।
ऊंचागांव क्षेत्र में फसल हुई जलमगभन
ऊंचागांव। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से किसानों की सैकड़ों बीघा जल मग्न हो गई है। क्षेत्र के गंगा किनारे बसे गांव माढू हसनगढ़ी, थाना गजरौला, माली मडै़या, चासी और फतेहपुर मडै़या के कई किसानों के खेतों में करीब एक माह पूर्व जलस्तर के बढ़ने से फसल नष्ट हो गई थी, जिसके बाद किसानों ने बाद में जलस्तर कम होने पर राहत की सांस ली थी। लेकिन, अब एक बार फिर पहाड़ी व मैदानी इलाकों में हुई बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। गंगा किनारे स्थित किसानों की फसल एक बार फिर गंगा की आगोश में समाने लगी है। हालांकि, अभी तक जल गंगा से बिल्कुल सटे हुए खादर इलाके की फसलों तक ही पहुंचा है। लेकिन, जलस्तर थोड़ा और बढ़ने पर किसानों को काफी नुकसान पहुंचेगा।