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खुशहालगढ़ के उपलों से दिल्ली में हो रहा हवन

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अनूपशहर क्षेत्र के गांव खुशहालगढ़ में रूई से बत्ती बनाती समूह की महिलाएं। - फोटो : BULANDSHAHR
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खुशहालगढ़ के उपलों से दिल्ली में हो रहा हवन
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बुलंदशहर। अनूपशहर क्षेत्र के गांव खुशहालगढ़ के उपलों से दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा में हवन-यज्ञ हो रहा है। इस गांव की महिलाएं गाय के गोबर के उपले बना रही हैं, जिसे नोएडा की एक कंपनी को दिया जा रहा है। गांव में नारी शक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 11 महिलाएं यह काम कर दूसरों के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं। उन्होंने इस कार्य की शुरूआत अप्रैल माह से की और अब तक 80 हजार रुपये के उपले बेच चुकी हैं।
नारी शक्ति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष पूजा देवी ने बताया कि समूह में पूनम देवी, सुनीता, अजंता, गुडिया, बबली, शशि देवी, मुकेश, अन्नू, रीता और पूनम शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पहले हम रुई से बनने वाली धूप बत्ती बनाने का काम करती थी। इन सभी को नोएडा की एक कंपनी को बेचती थी। कंपनी के अधिकारी एक बार गांव में आए थे। इस दौरान उन्होंने हमारे घर में पाली जाने वाली गाय को देखा तो उनके गोबर से उपले बनाने का सुझाव दिया। इसके लिए कंपनी ने गाय के गोबर के उपले लेने के लिए 800 रुपये क्विंटल के हिसाब से रेट तय किया। इसके बाद हम सभी ने मिलकर उपले बनाने का काम अप्रैल माह से शुरू कर दिया। एक महिला एक दिन में 10 किलो उपले बना लेती है। अब तक प्रत्येक महिला ने 10-10 क्विंटल उपले बनाकर बेच दिए हैं। इसकी एवज में प्रत्येक महिला को आठ-आठ हजार रुपये के हिसाब से 88 हजार रुपये की आय हो चुकी है। पूजा ने बताया कि इस समय बारिश का मौसम होने के कारण उपले नहीं बनाए जा रहे हैं, लेकिन कंपनी लगातार संपर्क कर रही है कि नवरात्र नजदीक हैं और उपले तैयार करें। ऐसे में प्रयास किया जा रहा है कि अधिक से अधिक उपले बनाए जाएं। मौसम साफ होते ही उपले बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। पूजा ने यह भी बताया कि कुछ महिलाएं घरों में ही बारिश से बचाकर अभी भी उपले बना रही हैं। इस कार्य के शुरू करने से हमारी अच्छी आमदनी हो रही है और परिवार को चलाने में भी कोई परेशानी नहीं आ रही है। अब सभी समूह की महिलाएं सोच रही हैं कि घर में और गाय पाली जाए, ताकि आमदनी को बढ़ाया जा सके। पूजा ने इस बात से भी साफ किया कि हम सभी समूह की महिलाएं ग्रामीण हैं और हमने किसी तरह से उपलों की बिक्री ऑनलाइन नहीं की है। कंपनी हमसे उपले लेकर अपनी कंपनी के नाम पर बेचती है।
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रुई से बनने वाली बत्ती से भी मिल रहा मुनाफा
पूजा ने बताया कि समूह से जुड़ी महिलाएं रुई से बत्ती बनाकर भी अच्छी कमाई कर रही हैं। समूह की महिला पूनम और पूजा बत्ती मशीन से बनाती हैं, उन्हें एक किलो रुई की बत्ती बनाने पर 150 रुपये प्रति किलो मिलते हैं। जबकि, शेष महिलाएं हाथ से बत्ती बना रही हैं और उन्हें 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से राशि मिलती है। सभी महिलाएं इस कार्य से प्रतिमाह चार से लेकर 12 हजार रुपये तक की आय प्राप्त कर रही हैं।
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