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जन्माष्टमी पर 23 घरों में जन्मे कान्हा, 17 में राधा

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जन्माष्टमी पर 23 घरों में जन्मे कान्हा, 17 में राधा
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बुलंदशहर। जन्माष्टमी के दिन सरकारी चिकित्सालयों से लेकर निजी अस्पतालों में किलकारी गूंजी। सोमवार को सरकारी चिकित्सालयों में 40 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 23 बालक तो 17 बालिका हैं। जन्माष्टमी पर बालक का जन्म लेने पर कान्हा और बालिका का जन्म लेने पर राधा का स्वरूप मान परिजनों में खुशी का माहौल बना हुआ है।
जनपद के सरकारी चिकित्सालयों में प्रतिदिन औसतन 60 से 70 डिलीवरी होती है, लेकिन कुछ त्योहार पर लोग शिशु का जन्म होना अच्छा मानते हैं। सोमवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर जिला महिला अस्पताल, महिला चिकित्सालय जटिया और संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद में 39 महिलाएं प्रसव पीड़ा होने पर भर्ती हुई। इस दौरान जिला महिला अस्पताल में 20, महिला चिकित्सालय जटिया में 10 और संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद में नौ डिलीवरी हुई। हात्माबाद निवासी संजीव की पत्नी सोनम को प्रसव पीढ़ा होने पर सोमवार शाम भर्ती कराया। जहां शाम छह बजे करीब पत्नी द्वारा कान्हा के रूप में बेटे को जन्म दिया। सास उषा ने बताया कि पहली संतान है, बेटे के रुप में भगवान श्रीकृष्ण घर पधारे हैं। वहीं, बच्चे का जन्म होने पर परिजन फूले नहीं समा रहे हैं। वहीं, गांव रौरा निवासी शैलेंद्र की पत्नी रिंकी को प्रसव पीड़ा होने पर भर्ती कराया गया। बताया कि पति ने जन्माष्टमी के दिन प्रसव कराने की इच्छा जताई थी। बेटा आया है वो भी जन्माष्टमी के दिन। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. ज्योत्सना ने बताया कि सभी जच्चा और बच्चा स्वस्थ हैं।
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कोट
बुलंदशहर, खुर्जा और सिकंदराबाद के अस्पताल में जन्माष्टमी के दिन 39 डिलीवरी की गई। इस दौरान एक महिला ने जुड़वा बेटियों को जन्म दिया। कुल डिलीवरी में 23 बालक तो नौ बेटियों का जन्म हुआ। जच्चा-बच्चा सभी स्वस्थ हैं। - डॉ. बलराज, डिप्टी सीएमओ।
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