ओलंपिक खिलाड़ियों के गांव में बनेगी स्पोर्ट्स लाइब्रेरी
बुलंदशहर। टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करने वाले पचौता निवासी बॉक्सर सतीश यादव, खुर्जा नगर निवासी स्क्रीट शूटर मेराज और गांव खबरा निवासी रोइंग खिलाड़ी अरविंद सिंह को बुधवार को जिला मुख्यालय पर डीएम रविंद्र कुमार ने शॉल ओढ़ाकर शील्ड और 50-50 हजार रुपये के चेक सौंपकर सम्मानित किया। डीएम ने कहा कि हमारे खिलाड़ी पदक से भले ही चूक गए, लेकिन उनके प्रदर्शन ने पूरे देश का दिन जीत लिया। तीनों खिलाड़ियों के गांवों में स्पोर्ट्स लाइब्रेरी की स्थापना कराने की डीएम ने घोषणा की। कहा कि यह गर्व का विषय है कि पूरे प्रदेश से 10 खिलाड़ियों ने ओलंपिक में प्रतिभाग किया, इनमें से तीन खिलाड़ी बुलंदशहर के रहने वाले हैं।
खिलाड़ियों ने अनुभव किए साझा
कार्यक्रम में तीनों खिलाड़ियाें ने अपने-अपने खेलों से संबंधित अनुभवों एवं ट्रेनिंग के बारे में अवगत कराया। इस मौके पर एडीएम वित्त सहदेव कुमार मिश्र, सीएमओ डा. विनय कुमार, एसपी सिटी सुरेंद्र नाथ तिवारी, सुखदेव शर्मा, ओलंपिक संघ के सचिव शाह फैसल, सचिव श्रीकांत शर्मा, प्रो. भीष्म सिंह, हरकेश सिंह, विजय सिंह, केसर देवी मौजूद रहीं।
पिता से मिला घायलावस्था में भी लड़ने का जज्बा: सतीश
अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर सतीश यादव ने ओलंपिक के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि पहले मैच में ही उनकी आंख के पास और ठुड्डी पर चोट लग गई थी। जिसके बाद अगले मैच में विश्व के नंबर एक बॉक्सर बखोदर जलालोव से भिड़ना था। ऐसे में पिता का मेसेज मिला कि हर हालत में रिंग में उतरना है, चाहे परिणाम जो हो। इसके बाद देश के लिए मेडल का सपना लेकर रिंग में उतरा। हालांकि सपना पूरा नहीं हो सका और इसका मुझे मलाल भी है। फिर भी अगले ओलंपिक में मेडल लाने के लिए जी-जान लगा दूंगा।
मेडल न जीतने का मलाल, नहीं छोड़ेंगे जीत की जिद : अरविंद
नौकायन में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खुर्जा के गांव खबरा निवासी अरविंद सिंह ने कहा कि ओलंपिक में देश के लिए मेडल न जीतने का मलाल है। अगले ओलंपिक में मेडल हर हाल में जीतूंगा। अरविंद के पिता विजय सिंह और मां केसर देवी ने कहा कि जिले के तीनों बेटों को ओलंपिक में खेलता देखकर गर्व हुआ। मेडल नहीं जीत सके तो क्या, एक छोटे से गांव से यहां तक पहुंचना किसी सपने के साकार होने जैसा है।
इस बार चूका निशाना, अगली बार लगेगा सटीक : मेराज
अंतरराष्ट्रीय स्क्रीट शूटर मेराज अहमद खान ने कहा कि इस बार मेडल से निशाना चूक गया, लेकिन अगली बार यह अवश्य सटीक बैठेगा। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है, बस इसी उद्देश्य से अगले ओलंपिक में एक बार फिर से मेडल के लिए जान लगाई जाएगी। जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बल्कि उन्हें पहचानने और तराशने के लिए संसाधनों की कमी है।