एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए जिला मुख्यालय तक लगानी पड़ रही दौड़
बुलंदशहर। कुत्ता-बंदर के काटने पर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों को जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। जानवरों के काटने पर 24 से 48 घंटे में पहला इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। जिले के अधिकांश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एआरवी न होने पर प्रतिदिन दूर-दराज के मरीज एआरवी के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके चलते भीड़ अधिक होने पर काफी देर तक इंतजार करना पड़ रहा है।
एआरवी लगाने की सुविधा जिला अस्पताल के अलावा समस्त सीएचसी पर होती है, साथ ही संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद, जटिया चिकित्सालय खुर्जा और 100 बेड राजकीय चिकित्सालय समेत करीब 20 केंद्रों पर एआरवी लगवाने की व्यवस्था है। जिला अस्पताल को छोड़कर अन्य स्थानों पर अक्सर एआरवी की कमी रहती है। इस कारण मरीजों को जिला अस्पताल आना पड़ता है।
तीन माह में पांच हजार से अधिक लोगों को लगी एआरवी
जिला अस्पताल में प्रतिदिन 150 से अधिक लोगों को एआरवी लगाई जा रही है। कभी-कभी यह आंकड़ा दो सौ के पार भी पहुंच जाता है। पिछले 10 दिनों में तीन दिन 200 से अधिक लोगों को एआरवी लगाई जा चुकी है। वहीं, जनवरी से 30 मार्च तक जिला अस्पताल में 5332 लोगों को एआरवी लगाई जा चुकी है।
इन स्थानों से आते हैं अधिक मरीज
जिले में जिला अस्पताल, जटिया चिकित्सालय खुर्जा, संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद, 100 बेड राजकीय चिकित्सालय डिबाई और 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व चार अरबन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई जाती है। लेकिन अधिकांश सीएचसी पर एआरवी समाप्त चल रही है। इसके चलते जिला अस्पताल में प्रतिदिन डिबाई, नरौरा, सिकंदराबाद, जहांगीराबाद, लखावटी, स्याना, दानपुर, पहासू, छतारी, खुर्जा और खानपुर आदि क्षेत्रों से मरीज एआरवी लगवाने के लिए आते रहते हैं। लखावटी सीएचसी पर 19 फरवरी से एआरवी समाप्त चल रही है तो डिबाई क्षेत्र में सप्ताह में सिर्फ एक दिन एआरवी लगाई जाती है।
सभी सीएचसी-पीएचसी पर एआरवी की उपलब्धता है। अगर कहीं पर कमी होगी तो वहां पर एआरवी भिजवा दी जाएगी। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
जिला अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में एआरवी उपलब्ध है। जो भी मरीज आते है। सभी को एआरवी लगवा दी जाती है। अधिकांश मरीज बाहरी क्षेत्र के होते हैं। - डॉ. राजीव प्रसाद, सीएमएस जिला अस्पताल