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20 साल बाद भी लंबित है रेलवे लाइन का प्रस्ताव

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20 साल बाद भी लंबित है रेलवे लाइन का प्रस्ताव
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- वर्ष 1997 में गढ़ से बुलंदशहर को जोड़ने की उठी थी मांग
- दिल्ली से बुलंदशहर और अनूपशहर को जोड़ने का नहीं बढ़ा प्रस्ताव
- रेल बजट नजदीक आते ही फिर उठने लगी मांग
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
बुलंदशहर-औरंगाबाद-स्याना से गढ़मुक्तेश्वर तक रेलवे लाइन का प्रस्ताव पिछले 20 साल से लंबित पड़ा हुआ है। कई बार पत्र लिखने के बाद भी रेलवे लाइन का प्रस्ताव फाइलों में दबा पड़ा है। उप्र डीआरयूसी के पूर्व सदस्य ने रेलमंत्री को पत्र लिखकर रेलवे बजट में प्रस्ताव शामिल करने की मांग की है।
उप्र डिवीजनल रेलवे सलाहकार उपयोगिता समिति (उत्तर रेलवे) के पूर्व सदस्य वीरपाल सिंह ने 28 अगस्त 1997 को डीआरयूसी की विशेष बैठक में यह प्रस्ताव रखा था। उस समय रेल मंत्री रामविलास पासवान थे। प्रतिनिधिमंडल ने रेलमंत्री से मुलाकात कर 55 किमी लंबे इस रूट पर रेलवे लाइन बिछवाने की मांग की थी। इस रूट पर सबसे पहले औरंगाबाद नगर फिर स्याना तहसील इसके बाद ऐतिहासिक गंगा स्थल गढ़मुक्तेश्वर शामिल है। गढ़ तक रेल लाइन बिछने से लाखों श्रद्धालुओं को इसका लाभ मिलेगा। देश का रेल बजट आने को है, इसलिए एक बार फिर लोग रेल लाइन बिछाने के लिए आवाजें उठाने लगे हैं। डीआरयूसी के पूर्व सदस्य वीरपाल सिंह ने बताया कि आजादी के बाद से बुलंदशहर जिले का उत्तरी भूभाग रेलवे लाइन न होने के चलते पिछड़ा हुआ है। वहीं कृषि में अच्छी उपज होने के बाद किसानों को अन्य वाहनों के जरिए फसल को पड़ोसी जिलों में जाना पड़ता है। रेलवे लाइन हो तो किसानों को इसका लाभ मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि रेलमंत्री को फिर से पत्र भेजकर 20 साल से लंबित प्रस्ताव को बजट में शामिल करने की मांग की है।
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ये मांगें भी हैं शामिल
बुलंदशहर से दिल्ली तक सीधी रेल सेवा की मांग, बुलंदशहर स्टेशन पर माल उतारने के लिए प्लेटफार्म बनवाने की मांग, बुलंदशहर स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन का मार्ग बढ़ाने की मांग एवं स्टेशन पर यात्रियों की सुविधाएं के लिए संसाधनों की व्यवस्था की जाए।
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अनूपशहर को भी रेलवे लाइन से जोड़ने की मांग
अनूपशहर तहसील क्षेत्र के भी निवासी रेलवे लाइन की मांग कर रहे हैं। इसके लिए पूर्व में सैकड़ों बार पत्र लिखकर रेल मंत्री एवं विभाग को अवगत करा चुके हैं। सन 2013 में इस परिक्षेत्र में केंद्र सरकार ने रेल लाइन सर्वे प्रस्तावित किया। रेलवे लाइन के लिए राजघाट नरौरा से दिल्ली वाया अनूपशहर, जहांगीरबाद, बुलंदशहर, सिकंदराबाद एवं गाजियाबाद को जोड़ने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। इससे क्षेत्रीय जनता में रोष है। कृषि क्षेत्र में अग्रणी होने के कारण रेल लाइन से जोड़ने से क्षेत्र के किसानों को उपज का सही मूल्य मिल सकेगा। इसके साथ ही क्षेत्र के धार्मिक महत्व को भी बढ़ावा मिलेगा। रेलवे बजट आने से पहले जिले के लोगों को काफी उम्मीदें हैं।
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