बदायूं। करीब पांच साल पहले पत्नी को मायके से विदा कराकर रास्ते में उसकी हत्या करने के जुर्म में पति को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश उदय भान सिंह ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने मुजरिम पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी डाला है। कोर्ट ने दो नामजद आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।
हत्या का मामला थाना बिल्सी क्षेत्र का है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुधीर कुमार मिश्रा के अनुसार थाना क्षेत्र के गांव सिरासौल निवासी हेमराज ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक हेमराज की भतीजी सुनीता का पति उग्रसेन निवासी ग्राम मिश्रीपुर मुकैया थाना मुजरिया उसकी विदा कराकर अपने साथ ले गया था। सुनीता के साथ उसका ढाई वर्षीय पुत्र शिवम भी था। हेमराज को रात में लोगों ने सूचना दी कि सिरासौल के जंगल में एक महिला का शव पड़ा है और उसके पास एक बच्चा भी लेटा है।
हेमराज ने मौके पर जाकर देखा तो वह लाश उसकी भतीजी सुनीता की थी। उसने उग्रसेन, उसके भाई ऋषिदेव और विजय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने सभी के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश उदयभान सिंह ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पत्नी की हत्या के जुर्म में पति उग्रसेन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। नामजद ऋषिदेव और विजय को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।