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डेनीप्रो से हंगरी पहुंचे तौहीद, ओसामा और इमरान

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साथी छात्रों के साथ निकले इस्लामनगर के ओसामा, तौहीद और इमरान। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। इस्लामनगर निवासी एमबीबीएस छात्र तौहीद आलम, ओसामा और इमरान यूक्रेन के डेनीप्रो से करीब 1100 किमी का सफर तय कर हंगरी पहुंच गए हैं। देर रात तक यह हंगरी बॉर्डर पार नहीं कर सके थे। परिवार वालों ने मंगलवार को छात्रों से बात की। छात्रों ने बताया कि डेनीप्रो में भी माहौल काफी खराब है।
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तौहीद आलम, ओसामा और इमरान डेनीप्रो स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस के छात्र हैं। छात्रों ने बताया कि डेनीप्रो में खाने-पीने के सामान की दुकानों पर स्टाक खत्म हो गया है। शहर में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। किसी भी तरह लोग यहां से निकलना चाहते हैं। दरअसल, डेनीप्रो शहर रूस बॉर्डर के करीब है। ऐसे में यहां कभी भी हमले का खतरा बना हुआ है।
छात्रों ने बताया कि 50 भारतीय विद्यार्थियों के ग्रुप ने डेनीप्रो से हंगरी पहुंचने के लिए बस बुक की थी। मंगलवार देर शाम वह किसी तरह हंगरी बॉर्डर पहुंच गए। काफी भीड़ होने के कारण अभी बॉर्डर पार नहीं कर सके । तौहीद, ओसामा और इमरान ने डेनीप्रो से हंगरी बॉर्डर रवाना होने और बस में भारतीय छात्रों के ग्रुप के साथ फोटो भी साझा किए हैं।
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मोहिता ने रोमानिया दूतावास में ली शरण, अब सुरक्षित
- शहर के मोहल्ला कबूलपुरा चौधरी सराय निवासी आरिफ हुसैन की बेटी मोहिता सैफ अब सुरक्षित है। मंगलवार दोपहर पिता आरिफ हुसैन ने मोहिता से बात की तो उसने बताया कि वह पूरी तरह से सुरक्षित है। यूक्रेन के टरनोपिल शहर स्थित टरनोपिल स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की छात्रा मोहिता ने बताया कि वह सोमानिया स्थित भारतीय दूतावास में है। यहां किसी तरह का खतरा नहीं है। दिल्ली के लिए फ्लाइट का इंतजार है। मोहिता करीब आठ सौ किमी दूरी तय कर यूक्रेन के टरनोपिल शहर से किसी तरह सोमानिया पहुंची थीं।
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बात करते हुए रुंध आया दानिश के पिता का गला
बिसौली के सीकरी निवासी दानिश यूक्रेन की खारकीव स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस के छात्र हैं। दानिश के पिता सादिक सेना से रिटायर्ड हैं। सादिक दिन में कई बार बेटे की कुशलता जानने के लिए उसको कॉल करते हैं। मंगलवार को दानिश से बात की तो उसने बताया कि खारकीव शहर पर भी रूस का हमला तेज हो गया है। यहां दो से तीन हजार भारतीय छात्र फंसे हुए हैं। हम लोगों के पास बंकर में छिपने के अलावा कोई चारा नहीं है। बात करते हुए सादिक का गला रुंध आया। उन्होंने बताया कि बिजली और पानी की की सप्लाई भी ठप हो चुकी है। बोले- टीवी पर समाचार सुनते हुए कई बार ऐसा लगता है कि इन हालात में बेटे की कुशलतापूर्वक वापसी कैसे हो सकेगी।
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खारकीव छोड़कर ट्रेन से लिविव निकले आनंद
शहर में डीएम रोड निवासी आनंद यादव खारकीव से मंगलवार को लिविव के लिए निकले हैं। लिविव से हंगरी बॉर्डर होते हुए वह निकलेंगे। आनंद यादव ने मंगलवार को पिता राघवेंद्र और अपने भाई से बात की। खारकीव के हालात के बारे में बताया। खारकीव पर हमले तेज होने के बाद आनंद के परिवार वाले परेशान थे। मंगलवार को जब परिवारवालों को पता कि खारकीव से आनंद सुरक्षित निकल आए हैं तो उनको कुछ सुकून महसूस हुआ।
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कीव से छह सौ किमी दूर प्रतीक्षा, परिवार से मिले नायब तहसीलदार
बिल्सी के मोहल्ला नंबर दो निवासी अवधेश मिश्रा की बेटी प्रतीक्षा मिश्रा सुरक्षित हैं। मंगलवार को भी परिवार वालों ने प्रतीक्षा से बात की। प्रतीक्षा ने बताया कि कीव पर रूसी सेना ने हमला तेज कर दिया है। वह कीव से करीब छह सौ किमी दूर दूवानो शहर में हैं। अभी यहां हमले नहीं हो रहे हैं। भारतीय दूतावास के अधिकारी उनसे लगातार संपर्क भी कर रहे हैं। इधर, बिल्सी के नायब तहसीलदार मोहम्मद अजहर अंसारी मंगलवार को प्रतीक्षा के घर पहुंचे। यहां परिवार वालों से बात की और बताया कि यूक्रेन से भारतीय छात्रों को स्वदेश वापसी के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है।
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आकाश को नहीं मिली ट्रेन में जगह, हॉस्टल लौटे
- वजीरगंज ब्लॉक के गांव बगरैन निवासी आकाश गुप्ता मंगलवार को खारकीव से निकलने के लिए स्टेशन पहुंचे थे, लेकिन ट्रेन में भीड़ होने के कारण उनको जगह नहीं मिली। इस पर उन्हें हॉस्टल लौटना पड़ा। आकाश ने फोन पर बताया कि ट्रेनों में क्षमता से कई गुना ज्यादा लोग निकल रहे हैं। खारकीव पर हमले तेज होने के बाद विदेशी छात्रों से ज्यादा स्थानीय लोग शहर छोड़ रहे हैं। खारकीव में जिस स्थान पर वह रहते हैं वहां से स्टेशन करीब 12 किमी दूर है। सोमवार और मंगलवार को दो बार वह स्टेशन गए, लेकिन उनको ट्रेन में जगह नहीं मिल सकी। संवाद
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