बदायूं। मथुरा-हाईवे पर उझानी थाना क्षेत्र में मंगलवार रात हुए हादसे में तीसरे मृतक की भी पहचान हो गई। वह सुमित सोलंकी निकला जो कासगंज के सिड़पुरा में अपने रिश्ते के चाचा विष्णु सोलंकी के साथ रह रहा था। मरने वालों में विष्णु सोलंकी व ड्राइवर गंगा सिंह भी शामिल थे। विष्णु के पिता जयप्रकाश सोलंकी सेना में कैप्टन पद से रिटायर्ड हैं।
मंगलवार रात सवा दस बजे उझानी कोतवाली क्षेत्र में मथुरा-हाईवे पर करुआ पुल के पास तेज रफ्तार सेंट्रो कार पेड़ से टकरा गई। हादसे में कार सवार तीनों लोगों की मौत हो गई। कार पेड़ में इस तरह फंस गई कि पुलिस ने उसे जेसीबी मंगाकर निकलवाया। वहीं कार की अगली खिड़की को काटकर मुश्किल से दो शव बाहर निकाले जा सके। देर रात दो मृतकों की पहचान हो सकी। इनमें कासगंज के सिड़पुरा निवासी 28 साल के विष्णु सोलंकी व सिड़पुरा के ही सुभाष नगर मोहल्ले का ड्राइवर 23 वर्षीय गंगा सिंह कश्यप थे। तीसरे मृतक 23 वर्षीय सुमित की पहचान रात दो बजे हो सकी। सुमित मूल रूप से सिड़पुरा के गांव हंसपुरा का निवासी था पर काफी समय से सिड़पुरा में अपने चाचा विष्णु के साथ ही रह रहा था। विष्णु की बिल्डिंग मेटेरियल की दुकान है।
पुलिस के मुताबिक कार की रफ्तार काफी तेज होने की वजह से हादसा होना मान रही है। परिवार के मुताबिक विष्णु की ससुराल सहसवान क्षेत्र में है। उनकी पत्नी मायके में थीं। बताते हैं कि यह लोग कार से वहीं जा रहे थे।
परिवार के इकलौते बेटे थे विष्णु सोलंकी
विष्णु सोलंकी अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। उनकी दो बहनें मधु और पिंकी हैं। उनकी शादी सहसवान इलाका निवासी दीपिका से हुई थी। उनकी एक छह साल की बेटी है। विष्णु सोलंकी कासगंज के इंदिरा नगर में सीमेंट सरिया की दुकान चलाते थे।
पिता ने लिखकर दिया- गाय बचाने के चक्कर में हुआ हादसा
विष्णु सोलंकी के रिटायर्ड कैप्टन पिता जयप्रकाश सोलंकी ने उझानी पुलिस को लिखकर दिया है कि ये हादसा गाय बचाने के चक्कर में हुआ था। तीनों लोग कासगंज से सहसवान जा रहे थे। इसी दौरान करुआ पुल के नजदीक उनके सामने से अचानक गाय आ गई और उसे बचाने की कोशिश में कार पेड़ से टकरा गई।
ड्राइवर कम दोस्त ज्यादा थे गंगा सिंह
- गंगा सिंह कासगंज में सुभाष नगर इलाके के रहने वाले थे। वह पांच भाइयों में तीसरे नंबर थे और गाड़ी चलाकर ही अपने परिवार का गुजारा कर रहे थे। वह विष्णु सोलंकी की गाड़ी चलाते थे। इससे हर समय उनके साथ रहना होता था। इससे वह ड्राइवर कम दोस्त ज्यादा हो गए थे। उनमें ये महसूस नहीं होता था कि गंगा सिंह ड्राइवर हैं।