बदायूं। 27 साल की शिप्रा पाठक 27 नवंबर को अयोध्या से रामेश्वरम के लिए 3952 किलोमीटर की पदयात्रा पूरी कर ली। बुधवार को वह अपने अपने घर दातागंज पहुंचेंगी।
हर दिन 30-34 किलोमीटर पैदल चलने के दौरान उन्होंने सरयू, गंगा, यमुना, सरस्वती, मंदाकिनी, तुंगभद्रा, कृष्णा, गोदावरी और वैगई नदियों जल एकत्र किया। इसी जल से भगवान रामेश्वरम का जलाभिषेक किया। शिप्रा इससे पहले जल संरक्षण की यात्रा कर चुकी हैं तब उन्हें वाटर वुमन कहा गया था। रामजानकी वनगमन यात्रा में वह उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक होकर तमिलनाडु के रामेश्वरम तक पहुंची। शिप्रा के रामेश्वरम पहुंचने पर भारतीय जनता पार्टी के कई जिलाध्यक्ष ,राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख पदाधिकारियों ने भागादारी की। उन्होंने राम जानकी वन गमन मार्ग पर लोगों के साथ संवाद किए। नदियों के प्रति जागरूक किया। शिप्रा ने मातृ शक्ति को भी माता जानकी के चरित्र को आत्मसात करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जानकी माता ने अयोध्या के राज पाट को छोड़कर श्री राम के साथ वन गमन कर धर्म को नया आयाम दिया।
राजनीकि परिवार की बेटी हैं शिप्रा
शिप्रा दातागंज की निवासी हैं। राजनीतिक परिवार है। पिता डॉ. शैलेश पाठक भाजपा के स्थानीय नेता हैं। दादी संतोष कुमारी पाठक कांग्रेस से विधायक रह चुकी हैं।
यह यात्राएं कर चुकी हैं शिप्रा
- नर्मदा नदी की 3600 किमी की परिक्रमा, पीलीभीत से बनारस कैथी तक गोमती नदी की 1008 किलोमीटर की पद यात्रा। पंच तत्व संस्था के माध्यम से पौधे लगाए। राम जानकी पद यात्रा का उद्देश्य जल, जंगल, नदी, पहाड़ को संरक्षित करने के लिए आम जन को प्रेरित करना।