बालाजी नगर में संवाद कार्यक्रम के दौरान युवा चर्चा करते हुए। संवाद
- फोटो : BADAUN
बदायूं। राजनीति में धनबल और बाहुबल का प्रयोग बढ़ता जा रहा है। ऐसे में शुचिता और ईमानदारी जैसी बातें गौण हो गई हैं। चुनाव आयोग जैसी सर्वमान्य संस्था की तगड़ी निगरानी के बाद भी ऐन केन बाहुबली व संपन्न लोग राजनीति में आ ही जाते हैं। विधानसभा चुनाव की नजदीकी देख अमर उजाला भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।
इस क्रम में अमर उजाला के बालाजी नगर में हुए संवाद कार्यक्रम में युवाओं ने हिस्सा लिया। चर्चा की गई कि चुनाव में प्रत्याशी कैसे हो। अधिकतर युवाओं का मत था कि बाहुबलियों को आदर्श बनाने के बजाय लोगों को साफ स्वच्छ छवि के प्रत्याशियों को वोट देना चाहिए।
-
राजनीति में सभी तरह के लोग आ रहे हैं। पहली जिम्मेदारी राजनीतिक दलों की है। उन्हें चाहिए कि प्राथमिक तौर पर ही गलत छवि के व्यक्ति को टिकट न दें। कुछ पार्टियां इस दिशा में काम कर भी रहीं हैं पर सुधार की जरूरत है।
- ध्रुवदेव गुप्ता
-
तमाम राजनेता रॉबिनहुड जैसी छवि बनाकर लोगों की सोच पर हावी होने का प्रयास करते हैं। जनता में भी ऐसे नेताओं को लेकर मत भिन्नता हो जाती है। लोग सोचते हैं कि आदमी गलत सही पर गरीबों का मसीहा है। ऐसे लोग बाद में बड़े पदों पर काबिज होकर उसी जनता का शोषण करते हैं।
- पुष्पेंद्र मिश्रा
-
साफ छवि के लोगों की सोच भी सकारात्मक होती है। ऐसे लोग जनप्रतिनिधि बनने के बाद अपनी जिम्मेदारी को ज्यादा सलीके से निभाते हैं। हालांकि यह भी सच है कि बिना धनबल व प्रभाव के चुनाव जीतना बहुत मुश्किल हो गया है। फिर भी अच्छे लोगों को राजनीति में स्थापित करने की जिम्मेदारी जनता की ही है।
- सुशील कुमार मौर्य
-
पिछले कुछ वर्षों में चुनाव आयोग बहुत सख्त हुआ है। चुनावी व्यय को लेकर भी निगरानी ज्यादा हो गई है। ऐसे में अच्छे लोगों के सीमित खर्च में राजनेता बनने का सफर भी आसान हुआ है। नेताओं को भी अब छवि पर जोर देना पड़ रहा है। मीडिया की सक्रियता से भी बाहुबली कटघरे में पहुंचे हैं। जनता को सही वक्त पर सही निर्णय लेने की जरूरत है।
- दिलीप जोशी