बदायूं/ दातागंज। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान, जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत सदस्यों के पदों को लेकर आरक्षण की अनंतिम सूची जारी होने के बाद कई धुरंधर परेशान हैं। दरअसल, आरक्षण ने कई का गणित बिगाड़ दिया है। चुनाव से पहले ही यह धुरंधर मैदान से बाहर हो गए हैं। अब ऐसे मोहरों की तलाश कर रहे हैं जिनको प्रधानी जितवाने के बाद पर्दे के पीछे से खुद प्रधानी चला सकें। इस दौरान आपत्तियों की भरमार है। सबसे ज्यादा आपत्तियां प्रधानी पद को लेकर आ रही हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण आवंटन की सूची दो मार्च को जारी हो चुकी है। इस सूची पर चार मार्च से आपत्तियां प्राप्त करने का सिलसिला शुरू हो गया। आपत्तियां करने वाले अधिकतर लोगों का यही तर्क है कि उनके यहां संबंधित वर्ग की आबादी कम है, फिर भी पद आरक्षित कर दिया गया।
आरक्षण आवंटन की अनंतिम सूची जारी होने के बाद वर्षों से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे कई दावेदारों की दावेदारी समाप्त हो गई है। अब भी कई को अपनी सीट का आरक्षण बदलने की उम्मीद है। दरअसल, जिले की कई ऐसी बड़ी ग्राम पंचायतें हैं, जहां प्रधानी पद पर असरदारों का कब्जा रहता है। अगर सीट आरक्षित हो जाती है तो वह अपने किसी भरोसेमंद को चुनाव में उतार देते हैं और उसे चुनाव जितवा कर पर्दे के पीछे से प्रधानी चलाते हैं।
दातागंज की ग्राम पंचायत रिजौला और सेहरा बछलिया में इस तरह के मामले सामने भी आ चुके हैं। रिजौला में मानसिक मंदित को ही एक असरदार परिवार ने प्रधान बनवा दिया था। बाद में पर्दे के पीछे से खुुद प्रधानी चलाई थी। मामला सुर्खियों में आने के बाद मानसिक मंदित को प्रधान पद से हटा दिया गया था। इसी तरह का मामला सेहरा बछलिया में सामने आया था। 30 अप्रैल तक प्रधानी के चुनाव होने हैं। इससे पहले बडी ग्राम पंचायतों के असरदार धुरंधर सीट आरक्षित होने के कारण अब अपने भरोसेमंदों पर दांव लगाने की तैयारी कर रहे हैं।
आरक्षण में बदलाव के लिए भी कर रहे कोशिश
- सीट आरक्षित होने के बाद कई धुरंधर तो आरक्षण में बदलाव की कोशिशों में भी जुटे हैं। सिर्फ आपत्तियां ही नहीं दे रहे बल्कि राजनेताओं के संपर्क में भी हैं। प्रधान पद को लेकर जो आपत्तियां अब तक आई हैं उनमें असहमति जताने वालों ने पिछले चुनावों का हवाला देने के साथ आबादी की बात का तर्क भी दिया गया है। कुछ लोगों का तर्क यह भी है कि उनकी ग्राम पंचायत को इससे पहले कभी आरक्षित नहीं किया गया था। ऐसे में इस साल भी आरक्षित नहीं होना चाहिए था। प्रधान पद के आरक्षण पर सवाल खड़ा करने वालों का कहना है कि उनके यहां आरक्षण बदलना चाहिए।
नौ से 12 मार्च तक आपत्तियों का होगा निस्तारण
- आरक्षण को लेकर आपत्ति दाखिल करने का समय आठ मार्च तक है। इसके बाद नौ से 12 मार्च तक आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। 14 तक अंतिम सूची प्रकाशित करने का समय दिया गया है। 15 मार्च को जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से अंतिम सूची पंचायती राज निदेशालय को भेजी जानी है। प्रधान पद का सपना देख रहे धुरंधर अंतिम आरक्षण सूची प्रकाशित होने से पहले किसी भी तरह आरक्षण में बदलाव की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
आठ मार्च तक आपत्तियां दाखिल की जा रही हैं। जो भी आपत्तियां आ रही हैं उनकी रिसीविंग दी जा रही है। 12 मार्च तक आपत्तियों का निस्तारण कर दिया जाएगा। 15 मार्च को आरक्षण की अंतिम सूची पंचायती राज निदेशालय भेजी जानी है।
- डॉ. शरनजीत कौर, डीपीआरओ