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सपा में अंदरूनी जंग बढ़ने के आसार, विरोधियों की नजरें गढ़ीं

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बदायूं। विधानसभा चुनाव में यूं तो अभी चार से पांच माह का वक्त बाकी है, लेकिन धीरे-धीरे जिले का सियासी पारा चढ़ने लगा है। शनिवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम शेरवानी ने जिले में दो कार्यक्रमों में शिरकत कर सपा के साथ ही जिले का सियासी तापमान बढ़ा दिया। इसके साथ ही सपा की अंदरूनी जंग बढ़ने की संभावना पैदा हो गई है। ऐसे में विरोधियों की नजरें सपा खेमे पर टिक गई हैं। शेरवानी के इस दौरे को चुनाव से पहले मुस्लिमों की गोलबंदी के रूप में भी देखा जा रहा है।
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दरअसल, एक दिन पहले ही शेखूपुर विधानसभा से पूर्व विधायक मुस्लिम खां ने दावेदारी की थी। शेखूपुर विधानसभा से सपा के प्रमुख दावेदार के रूप में पूर्व विधायक आशीष यादव और उनके बेटे हिमांशु यादव को देखा जा रहा है। सपा से निष्कासित आबिद रजा शहर सीट से तैयारी कर रहे हैं। पूर्व सांसद और केंद्रीय मंत्री सलीम शेरवानी की एक साल पहले ही सपा में वापसी हुई है। पांच बार सांसद रहे शेरवानी ने 2009 का चुनाव धर्मेंद्र यादव के खिलाफ लड़ा था और हार गए। इसके बाद वह 2014 में आंवला और 2019 में एक बार और धर्मेंद्र यादव के खिलाफ बदायूं से चुनाव लड़ चुके हैं।
2012 में सपा से विधायक चुने गए आबिद रजा शेरवानी और आजम खां दोनों के करीबी हैं। आबिद और धर्मेंद्र यादव के बीच 2016 से तकरार चल रही है। हालांकि, इसके बाद भी सपा ने 2017 में आबिद को टिकट दे दिया था।
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हाल ही में एक चैनल को दिए साक्षात्कार में पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा था कि आबिद रजा की सपा में वापसी का मतलब ही नहीं बनता है। इसी तरह के शब्द शुक्रवार को सपा जिलाध्यक्ष ने दोहराए थे, लेकिन शनिवार को शेरवानी ने जिस तरह से कहा कि वह आबिद के टिकट के लिए लड़ाई लडे़ंगे और आबिद की जल्द सपा में वापसी होगी अपने आप में कई संदेश दे गई। शेरवानी, आबिद और मुस्लिम खां को लेकर माना जा रहा है सपा की राजनीति मुस्लिम गोलबंदी पर केंद्रित हो रही है। ऐसे में सपा की अंदरूनी जंग बढ़ने के हालात भी बन रहे हैं।
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सलीम शेरवानी हमारी पार्टी के बड़े नेता हैं। उन्होंने आबिद रजा के संबंध में इस तरह का बयान क्यों दिया, मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहता। मैं पहले ही स्पष्ट कर चुका हूं आबिद रजा सपा में नहीं हैं। टिकट के लिए पहले उन नामों पर विचार किया जाएगा जो सपा में हैं और सपा को मजबूती दे रहे हैं। टिकट संबंधी सभी निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व को लेने हैं। इसमें मेरा या मेरे समकक्ष किसी नेता का टिप्पणी करना ठीक नहीं है।
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- प्रेमपाल सिंह यादव, सपा जिलाध्यक्ष
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