बदायूं। एनपीके और एनपी की कीमतों में इजाफा किए जाने से किसान नाखुश हैं। किसानों का कहना है कि इससे रबी की फसल की लागत बढ़ेगी।
डीजल-पेट्रोल की कीमतें पहले ही आसमान पर हैं। डीएपी की कीमतों में भी सरकार इजाफा कर चुकी है। अब एनपीके और एनपी की कीमतों में 70 से 250 रुपये तक का इजाफा किए जाने के बाद महंगाई की मार सीधे किसान पर होगी। किसान पहले से ही परेशान हैं। मौसम की मार फसलों को बर्बाद करती है, लेकिन सरकार का इस ओर ध्यान नहीं जाता। रबी की फसलों से काफी उम्मीद होती है। किसानों का कहना है कि इस तरह से कीमतों में इजाफा ठीक नहीं है। महंगाई पर काबू के बजाय सरकार महंगाई बढ़ाने का काम कर रही है।
किसानों की बात
महंगाई पहले से क्या कम थी जो सरकार ने अचानक से एनपीके और एनपी खाद के दामों में इजाफा कर दिया। रबी की फसल की भी लागत अब काफी बढ़ जाएगी। सरकार को महंगाई पर काबू के लिए कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन यहां तो महंगाई बढ़ाने का काम किया जा रहा है।
- रामाशंकर शंखधार
यूरिया और डीएपी के दामों में पहले ही इजाफा किया जा चुका है। किसानों को तय रेट पर खाद मिलती ही नहीं। ब्लैक से ही खाद खरीदनी होती है। अब एनपीके की कीमतों में इजाफा कर दिया गया है। इससे किसान पर बोझ बढ़ेगा, लेकिन ब्लैक करने वालों को पहले से ज्यादा मुनाफा होगा।
-पप्पू सैफी
एक ओर तो सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कहती है और दूसरी ओर बीज, खाद की कीमतों में लगातार इजाफा किया जा रहा है। किसान तो पहले से ही परेशान है। महंगाई की मार तो सभी झेल रहे हैं सरकार ने एनपीके की कीमतें बढ़ाकर किसान को अतिरिक्त महंगाई दे दी है।
-राजीव कुमार गुप्ता, किसान नेता
एनपीके खाद 50 किलोग्राम वाला बैग अब तक 1175 रुपये में मिल रहा था। इसकी कीमत एक दम बढ़ाकर 1450 रुपये के आसपास कर दी गई है। इस महंगाई का सामना सिर्फ किसान नहीं करेगा। रबी की फसलों की लागत बढ़ने के बाद आने वाले दिनों में आम लोगों को भी महंगाई झेलनी होगी।
-राजेश सक्सेना