सोनू के शव को परिजन पैतृक गांव गोंटिया ले गए। जबकि अमित और बबिता का गंगाघाट पर अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने बच्चों के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए पुलिस से संपर्क नहीं किया। इस बात की पुष्टि प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने भी की।
बच्चों की मौत परिवार वालों के लिए बनी पहेली
तीन बच्चों की रहस्यमय हालात में मौत के मामले में उनके परिजन कुछ भी समझ नहीं पा रहे हैं। बच्चों ने अधबुझी चिता के पास से क्या खाया या फिर कुछ ऐसा देख लिया, जिससे वे डर गए। इसका जवाब किसी पर नहीं है।
गंगा किनारे से घर लौटने के बाद सोनू ने तो चिता के पास से उठाकर कुछ खा लेने की बात बताई, लेकिन अमित और उसकी छोटी बहन बबिता डर-सहमे रहे। बताते हैं कि बच्चों की हालत बिगड़ने पर परिवार के कुछ सदस्य ग्रामीणों के साथ गंगा किनारे चिता के पास भी पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें राख के अलावा कुछ और नजर नहीं आया।
डॉक्टर ने बताई ये बात
नन्हे ने बताया कि कासगंज में बबिता को लेकर जब वह एक निजी क्लीनिक पर पहुंचा तो डॉक्टर ने बच्ची के अवसाद में होने की जानकारी दी। ग्रामीणों के कहने पर परिवार के लोगों ने बृहस्पतिवार दोपहर में एक बाबा से झाड़ फूंक भी कराई पर कोई फायदा नहीं हुआ। अमित चार भाई-बहनों में बबिता से बड़ा था। परिजनों को इस बात का भी मलाल है कि उनके साथ नन्हे की बहन रूपवती का बेटा सोनू भी चल बसा।
'बच्चों को लगा किसी बात की सदमा'
तीन बच्चों की मौत के मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक राजकुमार गंगवार ने कहा कि बच्चों को उनके पास नहीं लाया गया लेकिन जो लक्षण बताए जा रहे हैं इससे साफ है कोई ऐसा सदमा बच्चों को लगा कि उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई, उन्होंने खाना-पीना तक छोड़ दिया। बच्चों ने विषाक्त वस्तु खाई होती तो लक्षण कुछ अलग होते।