ककोड़ा मेला परिसर में लगी लाइट
- फोटो : अमर उजाला
मुगलों के बाद अंग्रेजों ने लगवाया मेला
मुगल शासन के बाद अंग्रेजों ने मेला ककोड़ा को और भव्यता के साथ लगवाना शुरू किया। इसके लिए अंग्रेजों ने 1937 में कादरचौक थाने के सामने मेला का सामान रखने के लिए तीन बड़े गोदाम बनवाए थे। इसमें तत्कालीन जिला बोर्ड चेयरमैन चौधरी बदन सिंह के नाम का शिलापट आज भी लगा है। हालांकि अब गोदाम जीर्णशीर्ण अवस्था में है। आजादी के बाद मेला बेसिक शिक्षा विभाग ने लगावाया। उसके बाद जिला प्रशासन की ओर से मेले का आयोजन किया गया। अब जिला पंचायत मेला लगवाती है।
ककोड़ देवी मंदिर के महंत धर्मगिरि ने बताया कि ककोड़ा मेले के बाद शुरू हुए दूसरे मेले ज्यादा भव्यता के साथ लगने लगे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण ककोड़ा मेले को आज तक राजकीय मेले का दर्जा नहीं मिल सका है। नेताओं को इस बारे में सोचना चाहिए।
महंत परमात्मा दास ने कहा कि ककोड़ा मेला अति प्राचीन मेला है जो मिनी कुंभ के नाम से जाना जाता है, लेकिन यहां कुंभ जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। मेले को राजकीय मेला घोषित किया जाना चाहिए, लेकिन इस बारे में नेताओं की ओर से कोई प्रयास नहीं किया जाता।
सोमवार को हवन-पूजन के साथ होगा उद्घाटन
सोमवार को ककोड़ देवी मंदिर से झंडी मेले में पहुंचेगी। झंडी स्थापना के बाद हवन-पूजन करके मेले का उद्घाटन किया जाएगा। इसके साथ ही मेले में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाएगा। शनिवार को मेले में लाइटिंग का काम तेजी से पूरा किया गया। मेले में पहुंचे युवाओं ने शनिवार को पंतगबाजी का आनंद लिया।
सोमवार सुबह साढ़े नौ बजे जिला पंचायत अध्यक्ष वर्षा यादव और जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी सुरेंदु कुमार दुबे ककोड़ देवी मंदिर पहुंचेंगे। वहां से झंडी लेकर मेला पहुंचेंगे। शुभ मुहूर्त में झंडी स्थापित की जाएगी।