उझानी (बदायूं)। महाशिवरात्रि पर कछला गंगाघाट शिवभक्तों की आस्था से सराबोर रहा। गंगा से लेकर शिवालयों तक हर हर महादेव की गूंज रही। सोमवार शाम से मंगलवार तड़के तक हजारों की संख्या में कांवड़िए जल भरकर गंगाघाट से शिवालयों की ओर निकले।
कछला गंगाघाट पर कांवड़ियों के आने का सिलसिला तीन दिन पहले से चल रहा था, लेकिन सोमवार को देर रात से लेकर मंगलवार तड़के तक गंगाघाट और बरेली-मथुरा हाईवे पर कांवड़ियों की संख्या हजारों में रही। ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर लगे डीजे पर शिव-पार्वती के भजनों पर थिरकते कलाकारों ने भी कांवड़ियों का उत्साह बढ़ाया। कांवड़ियों की टोली में शामिल नगर निवासी साइकिल सवार प्रेमचंद्र और नेमपाल ने बताया कि सोमवार रात में कई टोलियां शाहजहांपुर जिले में पटना देवकली के मंदिर की ओर गईं। इसमें बाइक सवार कांवड़ियों की संख्या भी कम नहीं रही। मंगलवार सुबह करीब नौ बजे तक आसपास के कांवड़ियों की टोलियों ने भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए उनकी महिमा का गुणगान किया। इससे पहले जल भरने के बाद कांवड़ पूजन के दौरान शिवभक्तों ने आरती भी की।
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बुर्रा मंदिर पर जुटी हजारों शिवभक्तों की भीड़
गांव बुर्रा फरीदपुर के प्राचीन शिव मंदिर पर जलाभिषेक का विशेष महत्व माना गया है। तड़के से ही यहां शिवभक्त मंदिर परिसर पहुंचने लगे। प्रात: सात से 10 बजे के बीच मंदिर परिसर और उसके आसपास इलाके में शिवभक्तों की भीड़ काफी बढ़ गई। सीओ गजेंद्र सिंह क्षोत्रिय, प्रभारी निरीक्षक हरपाल सिंह बालियान, प्रधान रंधावा यादव भी मौजूद रहे। भीड़ की वजह से मंदिर के बाहर बेरीकेडिंग भी ध्वस्त हो गई। इसके अलावा कठौली, हजरतगंज, रायपुर, बुटला गांवों के अलावा नगर के बड़े महादेव के मंदिर, पुरानी अनाज मंडी के शिव मंदिर में भी शिवभक्तों ने जलाभिषेक कर मत्था टेका। बुर्रा मंदिर पर भंडारे में शिवभक्तों ने प्रसाद भी पाया।
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‘बारहे’ के गांवों में निभाई रस्म, घर-घर बने पकवान
बुर्रा फरीदपुर के प्राचीन शिव मंदिर पर शिवतेरस पर काफी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करके पूजा-अर्चना करते हैं। इलाके के बुजुर्गों के मुताबिक-बुर्रा के मंदिर के आसपास के 12 गांव यादव बाहुल्य हैं। इन्हें ‘बारहे’ के नाम से भी पुकारा जाता है। अहम बात यह कि इस दिन बारहे मे अधिकतर ग्रामीणों के घर रिश्तेदार पहुंचते हैं। सुबह जलाभिषेक के बाद जब वे लौटते हैं तो उन्हें रिश्तेदारियों में लजीज पकवान खिलाए जाते हैं। इसका पूरे ‘बारहे’ में खास महत्व है। संवाद
कछला गंगाघाट से शिवालय की ओर रवाना होने से पहले एकत्र शिवभक्त। संवाद- फोटो : BADAUN