बदायूं। जिले में शहर से लेकर गांव तक लावारिस गोवंश सड़कों व खेतों में घूमता मिल जाएगा। इनकी वजह से किसानों को काफी नुकसान होता है तो कई बार गोवंश राहगीरों पर भी हमला भी कर देता है जिनसे उनकी जान पर बन आती है। इसे ध्यान में रखते हुए पशुपालन विभाग द्वारा गो संरक्षण केंद्र बनवाने की शासन से मांग की गई। वहां से स्वीकृति और धनराशि आवंटित होने पर जिले में दो वृह्द गो संरक्षण केंद्र बनाए जा रहे हैं। यहां गोवंश को रखा जाएगा।
जिले में सड़कों, खेतों में घूमने वाले लावारिस गोवंश को रखने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से 125 अस्थायी गोशालाएं संचालित हैं। इन गोशालाओं में तकरीबन छह हजार गोवंश हैं। अधिकतर गोशालाओं में गोवंश को रखने के लिए जगह नहीं है। इसको ध्यान में रखते हुए विभाग ने कादरचौक और दातागंज के पूर्व खेड़ा का चयन गो संरक्षण केंद्र निर्माण के लिए किया था। इस संबंध में प्रस्ताव शासन को भेजा गया जिसे मंजूर कर लिया गया है। इसके तहत जिले में कादचौक में वृह्द गो संरक्षण केंद्र का निर्माण लोक निर्माण विभाग तो पूर्व खेड़ा में आरईएस कर रहा है। इसके लिए 1.40 करोड़ रुपये स्वीकृति किए गए हैं।
500 से 600 गोवंश रह सकेंगे एक केंद्र पर
वृहद गो-संरक्षण में करीब पांच सौ से छह सौ गोवंश को रखा जा सकेगा। इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि पशुओं के विचरण करने के लिए पर्याप्त खुला स्थान भी रहे। साथ ही गोशाला में पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सक चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।
वृहद गो संरक्षण केंद्र बनाने का काम शुरू हो गया है। करीब 60 बीघा में एक केंद्र बनाया जाएगा। एक केंद्र की लागत एक करोड़ 20 लाख रुपये निर्धारित की गई है। ऐसे दो केंद्र तैयार हो रहे हैं। - डॉ. एके जादौन, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी