उसने बताया कि 19 सितंबर को उझानी कोतवाली के मुंशी गुलाब सिंह ने उसके साथ हाथापाई की थी। सब कुछ जानते हुए भी इंस्पेक्टर ने मुंशी का साथ दिया था। उस संबंध में वह मुंशी, इंस्पेक्टर और एसएसआई पर कई आरोप लगाते हुए तहरीर दे चुकी थी। उसने इंस्पेक्टर और एसएसआई की भूमिका पर सवाल उठाया था। कहा था कि इंस्पेक्टर और एसएसआई जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। आरोपी सिपाही मूलरूप से मुजफ्फरनगर का है और वर्तमान में उसका परिवार सीतापुर में रहता है। वहीं पीड़ित महिला सिपाही गाजियाबाद की बताई जा रही है। उधर, इंस्पेक्टर शैलेंद्र कुमार ने बताया कि महिला सिपाही की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई है। जातिवाद को बढ़ावा देने का आरोप बेबुनियाद है।
ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद से तनाव में थी सिपाही
उझानी कोतवाली में जिस दिन मुंशी और महिला सिपाही के बीच हाथापाई के बाद नोकझोंक की ऑडियो क्लिप वायरल हुई तो उसमें इंस्पेक्टर से उसकी बहस भी सामने आई। बताते हैं कि महिला सिपाही इंस्पेक्टर पर जातिवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाने लगी तो जवाब में इंस्पेक्टर को भी यह कहते हुए सुना गया कि ऐसा ही होगा। इधर, एक वीडियो में मुंशी की छुट्टी को लेकर बहस के दौरान अपनी मनमर्जी से काम करने की बात कहते हुए सुना गया। ऐसी ही बातों का महिला सिपाही ने एफआईआर में भी जिक्र किया है।