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मेला ककोड़ा : वीरान कटरी में आबाद होने लगा तंबुओं का शहर

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मेला ककोड़ा में लगाए गए वीआईपी टेंट। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। गंगा किनारे वीरान रहने वाली कटरी में रुहेलखंड के मिनी कुंभ ककोड़ा मेले में काम युद्धस्तर पर पहुंच गया है। मेला स्थल पर सड़कें बनने के बाद कटरी में तेजी से तंबुओं का अस्थायी शहर आबाद होने लगा है। काफी संख्या में दुकानदारों के साथ खेल-तमाशे वाले तो साधु-संत भी गंगा तट पर कल्पवास के लिए पहुंचने लगे हैं।
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कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य गंगा स्नान 19 नवंबर को होना है। शुक्रवार को झंडी पूजन के बाद शनिवार को मेला स्थल पर नजारा कुछ बदला हुआ दिखा। वीआईपी टेंटों तक लग्जरी गाड़ियां पहुंचने लगी हैं। काफी संख्या में परिवार भी मेला स्थल पहुंचे और गंगा स्नान के बाद पूजा अर्चना कर यहां भोजन भी किया। लगातार कई दिन तक गंगा तट पर कल्पवास करने वाले परिवारों ने डेरा-तंबू लगाने शुरू कर दिए हैं। सड़कों का निर्माण पूरा होने के बाद भारी वाहनों से झूला, खेल-तमाशे और दुकानों का सामान भी पहुंचना शुरू हो गया है। मेला स्थल पर टेंट लगने और दुकानदारों के पहुंचने के साथ ही यहां अस्थायी फायर स्टेशन भी खोल दिया गया है। एक फायर ब्रिगेड की गाड़ी की तैनाती भी हो गई है।
मेला स्थल पर निगरानी के लिए वाच टॉवर बनाए जाने का काम भी अंतिम चरण में है।
रविवार को एकादशी के दिन से मेलार्थियों का यहां पहुंचना शुरू हो जाएगा। वैसे शनिवार से ही काफी संख्या में मेलार्थी गंगा स्नान के लिए गंगा तट पर पहुंचने लगे। इसी क्रम में दुकानें सजने के साथ यहां जरूरत का सामान मिलना शुरू हो गया है। हालांकि, कुछ स्थानों पर अब भी अव्यवस्थाएं दिख रहीं हैं।
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वीआईपी और बरेली मार्ग का काम भी पूरा हुआ
गंगा तट पर वीआईपी और बरेली मार्ग बनाने का काम भी पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही यहां वीआईपी के लिए टेंट लगाने का काम अंतिम चरण में है। काफी टेंट लगने के बाद मेला स्थल पर अब नजारा बदला हुआ दिख रहा है। गंगा तट पर बिजली की व्यवस्था होने के बाद यहां अब चौबीस घंटे चहल-पहल दिखने लगी है। वीआईपी टेंटों में लाइटिंग के साथ काफी हद तक पथ प्रकाश का काम भी पूरा कर लिया गया है।
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पड़ोसी जिलों से पहुंचने लगा फोर्स
ककोड़ा मेले में पड़ोसी जिलों से पुलिस फोर्स ने आमद कराना शुरू कर दिया है। शनिवार को पीलीभीत, बरेली और शाहजहांपुर से काफी तादाद में पुलिस फोर्स मेला स्थल पर पहुंच गया। ऐसे में काफी संख्या में पुलिस कर्मियों ने मेला स्थल से कादरचौक थाने का रुख किया।
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कार्तिक माह और कल्पवास का महत्व पता रहे साधु-संत
मेला ककोड़ा पर काफी संख्या में साधु-संत भी पहुंच गए हैं। साधु-संतों ने गंगा तट पर कल्पवास शुरू कर दिया है। कई आश्रम बन गए हैं। दियूरी वाले मधुसूदनाचार्य ने भी कई संतों के साथ गंगा तट पर डेरा जमा लिया है। उनका कहना है कि स्कंदपुराण में बताया गया है कि कार्तिक जैसा माह, गंगा जैसा तीर्थ और सद्युग जैसा युग नहीं हो सकता। कार्तिक माह की गोपाष्ठमी, एकादशी, पूर्णिमा और प्रतिपदा का विशेष महत्व है। गंगा तट पर कल्पवास से सात्विकता, पवित्रता और निरोगता आती है। इन दिनों जमीन पर सोने का विशेष महत्व है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ धर्म जागरण के सह प्रांत संस्कृति प्रमुख प्रभुदास प्रवीण जी महाराज भी गंगा तट पर पहुंच गए हैं। उनका कहना है कि प्राचीन परंपराएं ही सनातन संस्कृति को जीवित रखे हैं। मेला ककोड़ा को मिली कुंभ कहा जाता है। भागीरथी से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है। प्राचीन परंपराओं का सम्मान और उनको बनाए रखना भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अंग हैं। मेला ककोड़ा भी इसी का एक हिस्सा है। संवाद
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