बदायूं। हिन्दी हमारी वास्तविक पहचान है, भारत की जान है। यह एक समर्थ भाषा है। यह कहना है हिन्दी साहित्यकारों का।
रविवार को हिंदी की महत्ता पर आयोजित ऑनलाइन गोष्ठी में हिन्दी शिक्षकों और कवियों ने अपने भाव प्रकट किए। गोष्ठी का आयोजन बदायूं क्लब के सचिव डॉ. अक्षत अशेष के निर्देशन में हुआ। संचालन अभिषेक अनंत ने किया।
-
कवियों ने कहा
हिंदी शुद्ध शाश्वत सपुता है, देववाणी की सुता है, हिंदी हमारी वास्तविक पहचान है, भारत की जान है।
- डॉ. उपदेश शंखधार, साहित्यकार
-
हिम सी शीतल, चांद सी चंचल, दीप सी देदीप्यमान, हिंदी तेरी महिमा का कितना करूं गुणगान।
- डॉ. दीप्ति वैभव जोशी, साहित्यकार
-
हिंदी हमारी शान है, इस देश का अभिमान है, हर एक शब्द में है भरा इसके अपरिमित ज्ञान है।
- अभिषेक अनंत, युवा कवि
-
हिंदी भाषा ही नहीं, न ये सिर्फ जुबान, यह अपने जय हिंद के नारे की पहचान
- डॉ. अक्षत अशेष, सचिव बदायूं क्लब, युवा कवि
-
विद्वानों ने कहा
राजभाषा के पद को रोजगारोन्मुख किया जाए। विधिक एवं वैज्ञानिक शब्दावली का निर्माण कर राजभाषा की स्वीकार्यता बढ़ाई जाए। प्रयास हो कि हिंदी और अपनी अन्य भारतीय भाषाओं को आत्मसात कर अंग्रेजी को विस्थापित किया जाए।
- डॉ. रविभूषण पाठक, एसोसिएट प्रोफेसर हिंदी
-
हिंदी हमारी राष्ट्रीय चेतना है। विश्व की सबसे समर्थ भाषा भी यही है। विश्व की किसी भी भाषा में एक ही अक्षर से सार्थक वाक्य नहीं रचा जा सकता। ये चमत्कार हिंदी में ही संभव है।
- डॉ. अरविंद धवल, गजलकार
-
हिंदी भारत की आत्मा है। यह जन जन के भावों की सशक्त अभिव्यक्ति है। हिंदी राष्ट्रप्रेम, धार्मिक चेतना और स्वाभिमान से जुड़ी है। इसके उत्थान को सब लोगों को मिलकर लगना होगा।
- डॉ. राम बहादुर व्यथित, वरिष्ठ साहित्यकार