बिल्सी। सिरासौल रोड स्थित सीएचसी में रोगियों का इलाज भगवान भरोसे है। यहां पहले से डॉक्टरों की काफी कमी है, उस पर भी यहां तैनात डॉक्टर अपनी मनमर्जी से आते-जाते हैं। डॉक्टरों, स्टाफ की मानमानी और अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा रोगियों को भुगतना पड़ता है।
बृहस्पतिवार को भी सीएचसी की ओपीडी में अव्यवस्थाएं रहीं। सुबह के समय यहां एक ही कक्ष में ओपीडी चल रही थी, जहां डॉ. प्रशांत कुमार त्यागी मरीजों को देख रहे थे। सुबह नौ बजे तक वह दस रोगियों को देख चुके थे। करीब दस बजे ओपीडी छोड़कर वह भी किसी विभागीय काम से जिला मुख्यालय चले गए। उनके बाद इसी कक्ष में फार्मासिस्ट सुनील कुमार शर्मा ने रोगियों को देखना शुरू कर दिया। साढ़े दस बजे तक सीएचसी कोई दूसरा डॉक्टर नहीं आया। ओपीडी के दूसरे कक्ष खाली पड़े रहे। यहां मरीज काफी देर तक डॉक्टर के इंतजार में बैठे रहे।
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रोजाना मरीजों को करना होता है इंतजार
अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सक और स्टाफ न होने के कारण क्षेत्र के मरीजों को घंटों बैठकर इंतजार करना पड़ता है। गांव सिलारपुर निवासी अंकित और वैन निवासी सेवाराम कान की दवा लेने आए थे। उन्हें बताया गया कि यहां कान-नाक-गला का कोई चिकित्सक नहीं है। इसलिए उन्हें जिला अस्पताल जाना होगा।
ओपीडी के बराबर में नेत्र परीक्षण अधिकारी कक्ष में कोई मौजूद नहीं था। बताया गया कि वह दोपहर बाद आएंगे। यहां अपनी आंख दिखाने आई कूबरी निवासी धर्मवती उनका इंतजार कर रही थीं।
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पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रही है कोविड वैक्सीन
शुरू से ही अस्पताल में कोविड वैक्सीन को लेकर अव्यवस्थाएं देखने को मिली हैं। बृहस्पतिवार को कोविड वैक्सीन कक्ष में दो कर्मचारी बैठे थे, जो वैक्सीन आने का इंतजार कर रहे थे। बताते है कि वैक्सीन जिला अस्पताल से पहुंचती है। वह समय पर नहीं आई थी, जिसके कारण वैक्सीन लगवाने वाले लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा।
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महिला चिकित्सक के अभाव में स्टाफ नर्स ही करती है प्रसव
केंद्र पर लंबे समय से स्थायी महिला चिकित्सक तैनात नहीं है। वर्तमान में यहां पर एक महिला चिकित्सक संविदा पर तैनात हैं, जो केंद्र पर बहुत कम आती हैं। अक्सर स्टाफ नर्स ही यहां गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराती हैं, जिससे कभी-कभी इलाज में लापरवाही होने पर मरीज की हालत बिगड़ भी जाती है।
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इमरजेंसी कक्ष में भी हर समय नहीं रहता है स्टाफ
स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य गेट के पास बना इमरजेंसी कक्ष भी पूरी तरह से खाली पड़ा था। न ही यहां कर्मचारी है और न ही स्टाफ । बताते है कि प्राय: चिकित्सक ओपीडी में बैठते है। इमरजेंसी होने पर ही वही चिकित्सक उठकर यहां पहुंचता है, जिससे ओपीडी भी बाधित होती है। बृहस्पतिवार को चिकित्साधीक्षक कक्ष तो खुला था, मगर वह 11 बजे तक अपने कक्ष में नहीं आ सके। उनके मोबाइल फोन पर कई बार कॉल की गई, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
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लगातार सीएचसी और पीएचसी का औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जहां भी कमियां मिलती हैं वहां कार्रवाई की जा रही है। सभी डॉक्टरों और स्टाफ को समय से आने की हिदायत दी गई है। अगर इसके बाद भी कहीं मरीजों को समस्या होती है तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ,सीएमओ