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संक्रामक रोग : 165 गांवों पर रखी जाएगी विशेष निगरानी

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मलेरिया विभाग का कार्यालय। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। संक्रामक रोगों के लिहाज से स्वास्थ्य विभाग और मलेरिया विभाग ने जिले में 165 ऐसे गांव चिह्नित किए हैं जो हाईरिस्क श्रेणी में हैं। वर्ष 2020 और 2021 में जिले में हाईरिस्क श्रेणी में शामिल गांवों की संख्या दो सौ से ज्यादा थी।
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जिले के पांच ब्लॉक ऐसे हैं जिनके गांवों में हर वर्ष संक्रामक रोगों का प्रकोप रहता है। इस बार स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग ने 165 गांव हाईरिस्क श्रेणी में रखकर टीमें बना दी हैं।
संक्रामक रोगों के साथ मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से बदायूं जिला प्रदेश स्तर पर हाईरिस्क श्रेणी में हैं। वर्ष 2018 से अब तक लगातार यहां हर वर्ष संक्रामक रोगों से बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही है। 2021 में जिले में डेंगू के मामलों ने रिकॉर्ड तोड़ दिया था। मौतों के आंकड़े में स्वास्थ्य विभाग लगातार खेल करता रहा। स्वास्थ्य विभाग ने निजी पैथोलॉजी लैबों की रिपोर्ट ही नहीं मानी और ज्यादातर मौतों को सामान्य श्रेणी में दर्ज कर दिया। जून के पहले और दूसरे सप्ताह प्री-मानसून बारिश के साथ ही जिले में संक्रामक रोगों का प्रकोप शुरू हो जाएगा। ऐसे में इस बार स्वास्थ्य विभाग ने खुद की किरकिरी होने से बचने की कोशिश की है।
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संक्रामक रोगों का प्रकोप शुरू होने से पहले स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग ने जिले में सर्वे करने के बाद 165 ऐसे गांव चिह्नित किए हैं जो संक्रामक बीमारियों खासकर मच्छर जनित बीमारियों के लिहाज से बेहद खतरनाक श्रेणी में हैं। इन गांवों को जलभराव, गंदगी और कूड़े के ढेरों को देखते हुए इस श्रेणी में रखा गया है। पंचायती राज विभाग को भी सूची भेजी गई है। स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की टीमों ने इन गांवों में अभी से अभियान शुरू कर दिया है।
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ग्राम पंचायतें नहीं ले रहीं दिलचस्पी
ग्राम पंचायतें गांवों में संक्रामक रोगों के संभावित प्रकोप को लेकर अभी से दिलचस्पी नहीं ले रही हैं। स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की ओर से ब्लॉक स्तर पर मच्छर और लार्वा नाशक दवाओं का वितरण किया जा रहा है, लेकिन गांवों में दवाओं का छिड़काव नहीं हो रहा है। प्री-मानसून बारिश के बाद वायु में नमी बढ़ने के साथ मच्छरों और इसके साथ ही मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप शुरू हो जाएगा। वायरल फीवर और डायरिया के रोगी भी बढ़ेंगे, मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग की ओर से पंचायत राज विभाग को लिखे जाने के बाद भी गांवों में जलभराव खत्म करने के इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। जलभराव वाले स्थानों पर ग्राम पंचायतों की ओर से डीडीटी और टेमोफॉस के घोल का छिड़काव भी नहीं कराया जा रहा।
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फोटो- 17
जिले में 165 ऐसे गांव चिह्नित किए गए हैं जो संक्रामक रोगों के लिहाज से हाईरिस्क श्रेणी में हैं। इन गांवों के संबंध में पंचायती राज विभाग को भी सूचित किया गया है। स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की टीमों ने इन गांवों में संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए अभी से काम शुरू कर दिया है। जून के मध्य से मच्छरजनित संक्रमक रोगों का प्रकोप शुरू हो जाएगा।
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-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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