फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शादी के समय कुंडली से जरूरी थैलेसीमिया की जांच कराएं

विज्ञापन
विज्ञापन
बदायूं। थैलेसीमिया एक आनुवांशिक बीमारी है। इस रोग के कारण हीमोग्लोबिन निर्माण के कार्य में गड़बड़ी होने के कारण रोगी व्यक्ति को बार-बार रक्त चढ़ाना पड़ता हैं। यह रोग न केवल कष्टदायक होता है बल्कि संपूर्ण परिवार के लिए कष्टों का सिलसिला लिए रहता हैं। जिले में भी तीन मासूम ऐसे हैं जो इस पीड़ादायक बीमारी से जूझ रहे हैं। वे नियमित रूप से जिला अस्पताल आते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि शादी के वक्त कुंडली के साथ थैलेसीमिया की जांच भी कराएं, नहीं तो मुश्किल होगी।
विज्ञापन

दरअसल, थैलेसीमिया होने पर शरीर में लाल रक्त कणिकाएं नहीं बन पाती हैं और जो थोड़े बनती हैं, वह काफी कम समय तक ही रहती हैं। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को बार-बार खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है और ऐसा न करने पर बच्चा जीवित नहीं रह सकता है। जिले में तीन बच्चे इस लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं। डेढ़ साल के एक बच्चे को यह बीमारी है। उसके परिवार वाले हर एक-डेढ़ महीने के अंतराल पर उसे लेकर आते हैं। हाल ही में 21 अप्रैल को उसे अस्पताल में रक्त चढ़ाया गया था। इसके अलावा दो अन्य बच्चे इस बीमारी से जूझ रहे हैं। उनकी उम्र ढाई और तीन साल है। उन्हें भी दो से तीन महीने के अंतराल पर खून दिया जाता है।
-
क्यों होता है थैलेसीमिया, क्या है निदान
थैलेसीमिया अनुवांशिक रोग है और माता अथवा पिता या दोनों के जींस में गड़बड़ी के कारण होता हैं। रक्त में हीमोग्लोबिन दो तरह के प्रोटीन से बनता है- अल्फा और बीटा ग्लोबिन। इन दोनों में से किसी प्रोटीन के निर्माण वाले जींस में गड़बड़ी होने पर थैलेसीमिया होता है। हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोर्सिस जांच में अनियमित हीमोग्लोबिन का पता चलता हैं। म्युटेशनल एनालिसिस जांच करने के बाद थैलेसीमिया का निदान किया जाता है।
विज्ञापन

-
थैलेसीमिया तीन प्रकार का होता है। इसमें सबसे ज्यादा खतरनाक थैलेसीमिया मेजर होता है। इसमें बच्चों को हर एक से डेढ़ माह बाद में ब्लड की जरूरत होती है, जबकि थैलेसीमिया इंटरमीडिएट में कभी-कभी ही ब्लड की जरूरत होती है। वहीं थैलेसीमिया माइनर में जीवन में एक-दो बार ही ब्लड की जरूरत पड़ती है, हालांकि जो बच्चे थैलेसीमिया माइनर से ग्रसित हैं उनका औसतन ब्लड नौ से दस यूनिट ही रहता है। इसलिए जब लोग वैवाहिक जीवन में जुड़ने जा रहे हैं तो कुंडली दिखाने के साथ-साथ दोनों ही लोग थैलेसीमिया की जांच अवश्य कराएं, क्योंकि अगर दोनों व्यक्ति को थैलेसीमिया है, तो जहां तक हो, शादी न करें। हालांकि बोन मैरो ट्रांसप्लांट से बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है, लेकिन भारत में चुनिंदा जगह ही ये इलाज संभाव है।
विज्ञापन

-डॉ. संदीप वार्ष्णेय, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला महिला अस्पताल बदायूं
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें