बदायूं। स्वास्थ्य विभाग में एक के बाद एक घपले, घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आ रहे हैं। अब ताजा मामला राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में 12.39 लाख से ज्यादा की वित्तीय गड़बड़ी का है। वर्ष 2016-17 में यह चूक एनएचएम के जिला लेखा प्रबंधक के स्तर से की गई। ऑडिट में मामला पकड़ा जाने के बाद सीएमओ ने जिले के 14 ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (बीपीएम) के वेतन से कटौती कर वसूली का आदेश दिया है।
स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2004 से 2006 के बीच करोड़ों के दवा खरीद घोटाले में हाल ही में आर्थिक अपराध शाखा ने तीन सीएमओ समेत सात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। यह सभी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। एक अन्य मामले में 2007 से 2012 के बीच एनएचएम में हुए घोटाले में सात बाबुओं के खिलाफ सीबीआई की विशेष कोर्ट ने ट्रायल शुरू किया है। तीन तत्कालीन सीएमओ भी इस घोटाला में आरोपी हैं। सात बाबू घोटाले की 21 लाख रकम जमा करने के बाद जमानत पर हैं। भ्रष्टाचार, घोटालों में कई और जांच भी चल रही हैं।
इस बीच 2016-17 के दौरान एनएचएम में 12.39 लाख से ज्यादा की वित्तीय अनियमितता पकड़ी गई है।
एनएचएम के बजट में किसी तरह की गड़बड़ी न हो इसके लिए जिला लेखा प्रबंधक की तैनाती है। इसके बावजूद यह घपला हो गया। दरअसल, जिले में ब्लॉक स्तर पर तैनात 14 बीपीएम को 12.39 लाख का वेतन मद में भुगतान कर दिया गया। बीपीएम का चयन आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से जून 2016 में किया गया था। बीपीएम को मनमाने ढंग से वेतन मद में भुगतान किया गया। अब यह वित्तीय अनियमितता पकड़ में आने के बाद बीपीएम के वेतन से कटौती कर 12.39 लाख की वसूली का आदेश दिया गया है।
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इन बीपीएम को किया गया नियम विरुद्ध भुगतान
उवैस अली, तुस्तजाब अली, नवेद अहमद, नाजिम सईद खान, मोहम्मद फराज, मोहम्मद शहवाज, सोनम गुप्ता, विक्रांत सक्सेना, कौशल कुमार शर्मा, आशुतोष शर्मा, राम मंगल सिंह, मोहित सक्सेना, रविशंकर पाराशरी, आयुष रस्तोगी।
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12 माह में की जाएगी वेतन से कटौती
सभी बीपीएम के वेतन से 12 माह में 1239238 रुपये की कटौती की जाएगी। हालांकि, अब तक इस मामले में किसी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है। सूत्रों ने बताया कि वित्तीय अनियमितता के इस मामले में आने वाले समय में एनएचएम के कुछ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
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एनएचएम में बीपीएम को 12.39 लाख से ज्यादा का भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। संबंधित बीपीएम के वेतन से इस राशि की कटौती शुरू कर दी गई है। वेतन भुगतान में वित्तीय गड़बड़ी जनवरी 2022 में पकड़ी गई थी। बीपीएम को तैनाती के बाद 2016-1017 से ही ज्यादा भुगतान किया जा रहा था। फिलहाल मामले में जांच जारी है।
- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ