बदायूं। डेंगू और मलेरिया के मौसम में स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 120 बेड की व्यवस्था की है, लेकिन सच्चाई इससे इतर है, सभी जगह व्यवस्थाएं आधी-अधूरी हैं।
इधर, मुख्यालय पर जिला अस्पताल में डेंगू और मलेरिया रोगियों के लिए 25 बेड के वार्ड की व्यवस्था की गई है। यह वार्ड खुद दुर्दशा का शिकार है। बिना स्टाफ के वार्ड बना दिया गया है। इस वार्ड के आसपास भी मच्छरों की नर्सरी पल रही है।
जिले में रोज मलेरिया और फैल्सीपेरम के मरीज मिल रहे हैं। अब तक दो डेंगू के मरीज भी सामने आ चुके हैं। मलेरिया के लिहाज से बदायूं हाईरिस्क श्रेणी में शामिल है। यहां बता दें बदायूं के समरेर, सालारपुर, जगत और दातागंज ब्लॉक में 2019 में मच्छरजनित बीमारियों का व्यापक प्रकोप था। इसके बाद 2020 में भी यहां मलेरिया का प्रकोप रहा। इस वर्ष मलेरिया और डेंगू का प्रकोप काफी कम है। बावजूद इसके सेहत महकमे की व्यवस्थाएं ढुलमुल हैं। गौर करने वाली बात यह है कि जिले में अब तक किसी सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पताल में 20 बेड की व्यवस्था भी नहीं दिख रही है।
यही नहीं सीएचसी और पीएचसी स्तर पर जो मलेरिया और डेंगू वार्ड बनाए भी गए हैं तो वहां भी व्यवस्थाएं ठीक नहीं हैं। मलेरिया के रोगी लगातार मिल रहे हैं। हालांकि, अब तक एक डेंगू के रोगी को छोड़ दें तो अन्य को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं हुई है। लेकिन, अगर मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप ज्यादा बढ़ता है तो हालात गंभीर हो सकते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में एक भी मौत नहीं
स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में अब तक बुखार से एक भी मौत नहीं हुई है। जबकि दूसरी ओर समरेर ब्लॉक के तुगलापुर में दो और उसावां के रसूलपुर में एक व्यक्ति की बुखार से मौत हो चुकी है। गौर करने वाली बात यह है कि अब तक जिले में एक हजार से ज्यादा मलेरिया के रोगी मिल चुके हैं, लेकिन अब तक अस्पताल में किसी को भर्ती ही नहीं कराया गया है। डेंगू के दो मरीजों में एक का इलाज राजकीय मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।
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जिले में मलेरिया, डेंगू के रोगियों के लिए 120 बेड की व्यवस्था की गई है। अब तक किसी की मौत मच्छरजनित बीमारियों से नहीं हुई है। इस वर्ष बदायूं अपने आसपास के जिलों की मलेरिया से लड़ाई में मदद कर रहा है। हमारे यहां ज्यादा प्रकोप नहीं है।
- योगेश सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी