बदायूं। जिले में मलेरिया के रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इस बीच डेंगू का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को अलग-अलग स्थानों पर मलेरिया के 38 नए रोगी मिले हैं। इनमें एक को फैल्सीपेरम मलेरिया की पुष्टि हुई है। अब तक जिले में कुल रोगियों की बात करें तो मलेरिया के 855 और फैल्सीपेरम के 51 रोगी मिल चुके हैं।
मलेरिया के लिहाज से जिले के सालारपुर, समरेर, दातागंज और जगत गांव संवेदनशील हैं। सालारपुर ब्लॉक के गांव शेरगंज में तो एक सप्ताह में जानलेवा फैल्सीपेरम मलेरिया के 24 रोगी सामने आ चुके हैं। पिछले वर्ष भी सालारपुर में ही मलेरिया के सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे। मलेरिया के बीच जिले के दो सौ से ज्यादा गांवों में वायरल फीवर का प्रकोप भी बना हुआ है। सीएचसी और पीएचसी की ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में एकाएक इजाफा हो गया है। पिछले 15 दिन से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से बुखार प्रभावित गांवों में हेल्थ कैंप लगाए जा रहे हैं लेकिन इसके बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो रही।
मलेरिया और डेंगू के लिहाज से सितंबर को ज्यादा खतरनाक माना जाता है। हालांकि, जिले में डेंगू का कोई मामला अभी सामने नहीं आया है लेकिन डेंगू का खतरा बना हुआ है। इस बीच स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग गांवों के तालाबों में गंबूजिया मछलियां छुड़वा रहा है। मंगलवार को भी कई स्थानों पर हेल्थ कैंप के साथ तालाबों में मछलियां छुड़वाई गईं।
आशा वर्कर्स को एक जांच पर मिलेंगे 15 रुपये
बदायूं। जिले भर में घर-घर बीमारों के सर्वे का काम भी शुरू हो रहा है। यह काम आशा वर्कर देखेंगी। आशा वर्कर को घर-घर जाकर एक निर्धारिक प्रपत्र पर संबंधितों की बीमारी के संबंध में पूरा ब्यूूरा भरना होगा। इसके साथ ही आशा वर्कर मलेरिया की जांच में भी सहयोग करेंगी। एक जांच के बदले आशा वर्कर को 15 रुपये का भुगतान किया जाएगा। मलेरिया विभाग को इसके लिए नौ लाख रुपये का बजट मिला है। यह बजट ब्लॉकों पर भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष मलेरिया के कम मामले सामने आ रहे हैं। कुछ गांवों में वायरल का प्रकोप है। गांवों में हेल्थ कैंप लगाए जा रहे हैं। संक्रामक और मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम में आशा वर्कर का सहयोग भी लिया जा रहा है।-डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ