बदायूं। जिले में इन दिनों वायरल बुखार का जबरदस्त प्रकोप है। मलेरिया और फैल्सीपेरम मलेरिया खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 1200 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें करीब 90 फीसदी मरीज वायरल फीवर, टायफाइड और मलेरिया के रहते हैं।
जिले में मलेरिया पिछले तीन सालों से कहर बरपा रहा है। बारिश का सीजन होने से मच्छर जनित बीमारियों और वायरल फीवर ने अपने पैर पसार दिए हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में भीड़ जुटने से इन दिनों बड़ी मात्रा में पैरासीटामॉल और एंटीबायोटिक दवाओं की खपत हो रही है। पैथालॉजी में प्रतिदिन औसतन 250 लोगों की जांच में 200 लोग वायरल फीवर, टाइफाइड और मलेरिया का शिकार निकल रहे हैं।
बुधवार को ओपीडी में लंबी लाइनें लगी रही, ओपीडी के बाहर भी मरीज इधर-उधर बैठे नजर आए। गौर करने वाली बात यह है कि ओपीडी के वायरल क्लीनिक से डॉक्टर गायब थे, जबकि मरीजों की भीड़ लगी थी। यही हालात सीएचसी और पीएचसी में हैं। फिलहाल मलेरिया वार्ड में कोई गंभीर मरीज नहीं है।
हसनगर गांव में भी फैला मलेरिया, चार मरीज मिले
बदायूं। पिछले तीन दिनों में मलेरिया के रेेगियों की संख्या बढ़कर 29 हो गई है। शुक्रवार को जांच के दौरान चार नए रोगी मिले हैं। अब सालारपुर के गांव हसनगर में फैल्सीपेरम मलेरिया ने दस्तक दे दी है।
पिछले तीन वर्षों से मलेरिया के लिहाज से चार ब्लॉकों के सौ गांव संवेदनशील हैं। सबसे ज्यादा स्थिति सालारपुर ब्लॉक में खराब हो रही है। यहां शेरगंज गांव में मंगलवार को फैल्सीपेरम मलेरिया के 14 और बुधवार को नौ मामले सामने आए। एक मामला बेला गांव में मिला। बृहस्पतिवार को सालारपुर में एक मामला सामने आया। शुक्रवार को जिले में कुल 939 बुखार पीड़ितों की जांच की गई। इनमें मलेरिया के 17 और फैल्सीपेरम मलेरिया के चार रोगी मिले हैं। यह सभी रोगी सालारपुर ब्लॉक के गांव हसनगर के हैं। मलेरिया प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की टीमें लार्वा नष्ट करने के साथ मच्छर नाशक दवाओं का छिड़काव कर रही हैं। सीएमओ डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर का कहना है कि प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें कैंप कर रही हैं।
पैरासीटामॉल और एंटीबायोटिक दवाओं की खपत बढ़ी
वायरल फीवर और टाइफाइड का प्रकोप बढ़ने के साथ ही पैरासीटामॉल और एंटीबायोटिक दवाओं की खपत बढ़ गई है। स्टोर प्रभारी प्रदीप चतुर्वेदी का कहना है कि इन दिनों स्टोर से रोजाना औसतन आठ से नौ सौ डोज वायरल फीवर, टाइफाइड की निकल रही हैं। पैरासीटामॉल और एंटीबायोटिक दवाओं की इन दिनों मांग बढ़ी हुई है। फिलहाल वायरल फीवर की दवाओं की कोई कमी नहीं है। मांग के अनुरूप डिमांड भी भेज दी गई है।
इन दिनों वायरल फीवर के ज्यादा मरीज आ रहे हैं। ओपीडी में औसतन प्रतिदिन 1200 मरीजों में 90 फीसदी मरीज वायरल फीवर के पहुंच रहे हैं। दवाओं की कोई कमी नहीं है। अस्पताल में मलेरिया और डेंगू वार्ड भी बना दिए गए हैं। अगर ओपीडी में किसी डॉक्टर के स्तर से लापरवाही हो रही है तो कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. विजय बहादुर राज, सीएमएस