बदायूं। कोरोना काल के दौरान यूपी बोर्ड ने बिना मुख्य परीक्षा के ही हाईस्कूल और इंटर के परीक्षार्थियों को पास कर दिया था। इसे लेकर अभ्यर्थियों की लगातार आपत्ति थी कि वे अगर परीक्षा देते तो अच्छे नंबर ला सकते थे। मांग के अनुरूप यूपी बोर्ड ने अंक सुधार परीक्षा कराई तो पौने आठ सौ में से 103 बच्चे फेल हो गए। उन्हें अब वह उसी कक्षा में पढ़ना पड़ेगा।
कोविड-19 की वजह से पिछले साल स्कूल, कॉलेज लगभग पूरे साल बंद रहे। ऐसे में पढ़ाई प्रभावित न हो, इसको ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने ऑनलाइन पढ़ाई कराना शुरू की। ऑनलॉइन पढ़ाई में नेटवर्क की दिक्कत सबसे ज्यादा आई। इसी तरह की तरह की अन्य दिक्कतों को देखते हुए बोर्ड ने मुख्य परीक्षा नहीं कराने का फैसला लिया। ऐसे में जितने भी परीक्षार्थी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में पंजीकृत थे। सभी को पिछली परीक्षाओं के आधार पर पास करते हुए नंबर दे दिए गए। बावजूद इसके इनमें कुछ परीक्षार्थियों ने दावा किया कि अगर वे परीक्षा देते तो उनके बेहतर नंबर होते।
इसको ध्यान में रखते हुए बोर्ड की ओर से अंक सुधार परीक्षा कराई गई। इसमें बोर्ड ने निर्देश दिए थे जो भी परीक्षार्थी इस परीक्षा में शामिल होंगे। उनके जो नंबर आएंगे, वह ही अंतिम रूप से मान्य होंगे।
ऐसे में जिले से अंक सुधार परीक्षा में हाईस्कूल में 337 और इंटरमीडिएट के 516 परीक्षार्थियों नेे पंजीकरण कराया। अंतत: इनमें से हाईस्कूल में 294 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी जिसमें 217 पास हुए। वहीं इंटरमीडिएट में 481 परीक्षार्थी परीक्षा में बैठे। इसमें से 455 उत्तीर्ण हुए। ऐसे में103 परीक्षार्थियों के हाथ निराशा लगी, उनके नंबर तो नहीं बढ़े, फेल जरूर हो गए। अब इनके पूर्ववर्ती पासिंग मार्क्स भी दरकिनार कर दिए गए हैं। इन परीक्षार्थियों को अब पुरानी कक्षाओं में दोबारा पढ़ाई करनी होगी। (संवाद)
यूपी बोर्ड ने जो अंक सुधार परीक्षा आयोजित की थी उसमें साफ निर्देश दिए थे कि जो भी परीक्षार्थी इस परीक्षा में शामिल होंगे, उनके अंक सुधार परीक्षा वाले नंबर ही अंतिम माने जाएंगे। उसी के आधार पर उनको अंकपत्र दिए जाएंगे। अब जो फेल हो गए हैं उन्हें नियमानुसार पिछली कक्षा में ही पढ़ना होगा।
- राकेश कुमार, सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद क्षेत्रीय कार्यालय बरेली